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डॉक्टरों को खुश करने के लिए वीरभद्र सरकार ने जनता को दिया झटका, विपक्ष भी रहा मौन

Sat, 01 Apr 2017 10:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sat, 01 Apr 2017 10:51 AM IST
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HP Govt Passed mediperson act in Himachal, BJP Not Protested.

चुनावी साल में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को खुश करने के लिए हिमाचल सरकार ने एकतरफा कानून पारित करवाकर लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ किया गया है। अगर मरीजों और तीमारदारों ने अस्पतालों में किसी कारण से डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों से झगड़ा किया तो वे सलाखों के पीछे होंगे।

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प्रदेश सरकार ने कानून में संशोधित कर अब इसे गैर जमानती अपराध बना दिया है। यानी अब मरीजों और तीमारदारों को जमानत भी नहीं मिलेगी। ये आरोपों को सच साबित करने के पहले की स्थिति होगी। बेशक, बाद में कोर्ट में यह साबित नहीं हों।
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अगर अदालत में इल्जाम साबित हो गए तो तीन साल की कैद होगी। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने शुक्रवार को विधानसभा में हिमाचल प्रदेश चिकित्सीय सेवा व्यक्ति और चिकित्सीय सेवा संस्था (हिंसा और संपत्ति के नुकसान का निवारण) संशोधन विधेयक 2017 को पारित करने का प्रस्ताव रखा।

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पहले था ये कानून, सरकार बनी मेहरबान

HP Govt Passed mediperson act in Himachal, BJP Not Protested.

इससे पहले 2009 के अधिनियम में व्यवस्था थी कि जो कोई भी डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ हिंसात्मक कार्य करेगा या किसी चिकित्सा सेवा संस्था की संपत्ति को नुकसान पहुंचाएगा, उसे दोष साबित होने पर एक साल कारावास की सजा होगी।

यह जमानती अपराध था। अब संशोधन अधिनियम में तीन साल की कैद और इस अपराध को गैर जमानती बना दिया गया। स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि यह बिल मेडिकल अधिकारियों की मांग पर बनाया गया है।

डॉक्टरों के साथ मारपीट होने की बात भी सही है, मगर ऐसे मामलों में शिकायत केवल कंपीटेंट अथॉरिटी ही करेगी। क्षेत्रीय अस्पतालों में शिकायत एमएस के माध्यम से होने पर ही इस पर संज्ञान लिया जाएगा।

हैरानी की बात, बिल पारित करते वक्त विपक्ष भी रहा मौन  

HP Govt Passed mediperson act in Himachal, BJP Not Protested.

आम तौर पर विभिन्न मामलों में अपना विरोध जताने के लिए खूब हंगामा करने वाले भाजपा विधायक इस विधेयक के पारण के समय शांत ही नजर आए। केवल भाजपा के मुख्य सचेतक एवं शिमला के विधायक सुरेश भारद्वाज ने ही इसका हल्का विरोध किया। मगर जब बिल पारित करने का वक्त आया तो पूरा विपक्ष मौन ही रहा। 

ये एकतरफा कानून है: भारद्वाज
विधायक सुरेश भारद्वाज ने इस दुरुपयोग की आशंका जताते हुए कहा कि यह एकतरफा कानून होगा। गांव से लोग इलाज करवाने अस्पताल आएंगे। किसी कारण से मरीज या तीमारदार ने डॉक्टरों या स्वास्थ्य कर्मियों को कुछ बोला तो वे गैर जमानती अपराध बना देंगे।

उन्होंने ये भी कहा कि अस्पतालों में डाक्टरों पर जो खर्चा होता है, वह भी जनता से आता है। ये टैक्स पेयर का मनी और डाक्टर करदाता के प्रति जवाबदेह हैं। अस्पताल पेशेंट के लिए होने चाहिए, मरीज वहां बेसिक व्यक्ति होना चाहिए।

पेशेंट की देखभाल की जिम्मेवारी सरकार की है। अगर हम अस्पतालों में जाएं तो मरीजों को कोई पूछता नहीं है। इस प्रकार के कानून विशेष वर्ग के लिए बनकर रह जाएंगे। उन्होंने कहा कि बिल को पारित करने से पहले इसे सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाए। 

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