पहले भानुपल्ली से तो आए ट्रेन तभी तो लेह तक आगे बढ़ेगी
पहले ट्रेन पंजाब के भानुपल्ली से बिलासपुर तक तो पहुंचे, उसके बाद बिलासपुर से मनाली होते हुए लेह पहुंचेगी। सामरिक महत्व के नेशनल प्रोजेक्ट बिलासपुर-मनाली-लेह का निर्माण युद्धस्तर पर शुरू तो हो गया है, लेकिन भानुपल्ली-बिलासपुर बेसलाइन में पेच फंस गया है।
केंद्र सरकार बिलासपुर-मनाली-लेह तक 83,360 करोड़ खर्च रही है, लेकिन बिलासपुर से भानुपल्ली के बीच 63 किलोमीटर लंबा ट्रैक बनाने का करीब आधा खर्च हिमाचल सरकार पर डाला गया है।
हिमाचल को बेसलाइन पर ही 1500 करोड़ से ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे, जबकि सरकार का कोष खाली है। हिमाचल से होते हुए चीन की लेह स्थित सीमा तक रेल ले जाने को केंद्र सरकार ने 465 किलोमीटर लंबे ट्रैक के पहले चरण के फाइनल लोकेशन सर्वे का काम पूरा कर लिया है।
परियोजना की लागत 83,360 करोड़
परियोजना की लागत 83,360 करोड़ आंकी गई है। इसका 244 किलोमीटर लंबा हिस्सा सुरंगों से गुजरेगा। 74 सुरंग बनाई जाएंगी। यह योजना चीन की शंघाई-तिब्बत रेलवे लाइन से भी अधिक ऊंचाई पर होगी। इसका सारा खर्च केंद्र सरकार उठा रही है।
पंजाब के भानुपल्ली और बिलासपुर के बीच करीब 63 किलोमीटर पैच बनाने का काम हिमाचल पर थोपा है। सरकार इस पैच को राष्ट्रीय परियोजना में शामिल करने का मामला कई बार उठा चुकी है। इसके लिए केंद्र तैयार नहीं है।
इसका निर्माण पुराने समझौते के अनुसार करने को कहा जा रहा है। प्रोजेक्ट की लागत का केंद्र 75 प्रतिशत पैसा देगा और हिमाचल को 25 फीसदी लागत उठानी है। वर्तमान में ट्रैक की अनुमानित लागत 2967 करोड़ आंकी गई है।
हम केंद्र को मदद के लिए लिख रहे : खाची
इसमें हिमाचल का कम से कम 1500 करोड़ खर्च आ रहा है। ज्यादा खर्च भू-अधिग्रहण में आ रहा है। पुराने समझौते के अनुसार केंद्र सरकार भू-अधिग्रहण के लिए केवल 70 करोड़ ही देगी। 11 साल पहले इसे बनाने का फैसला आठ अगस्त 2007 को हुआ था।
तब इसकी लागत 1,047 करोड़ आंकी गई। जून 2017 में लेह में तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने इसका फाइनल लोकेशन सर्वे के लिए शिलान्यास रखा, जो अब पूरा हो चुका है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव योजना अनिल खाची का कहना है कि पुराने समझौते के अनुसार बेसलाइन का हिमाचल को काफी खर्च उठाना पड़ेगा। केंद्र को मदद के लिए लिखा जा रहा है।
इसका बिलासपुर-मनाली-लेह की तर्ज पर खर्च केंद्र उठाए तो राज्य पर इसका ज्यादा भार नहीं पड़ेगा। हिमाचल को तो रेल ट्रैक चाहिए। हम किसी भी स्थिति को तैयार भी हैं।