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चकौताधारकों को लीज पर मिलेगी जमीन, देना होगा किराया

Fri, 16 Oct 2015 10:13 AM IST
Updated Fri, 16 Oct 2015 10:13 AM IST
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hp govt big decision on land use in himachal.

अगर चकौताधारकों के पास 20 बीघा से अधिक जमीन चकौता के तहत है तो उन्हें उसे भी लीज पर दिया जाएगा। सरकार ने वीरवार को इस संबंध में योजना को अधिसूचित कर दिया है। इस योजना का नाम हिमाचल प्रदेश चकौताधारक सांपत्तिक अधिकार स्कीम 2015 रखा गया है।

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राज्य सरकार ने इस स्कीम को अधिसूचित करने से पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि प्रदेश में चकौताधारकों को पांच बीघा तक की भूमि का मालिकाना हक दिया जाएगा। इसके अलावा 20 बीघा तक की भूमि को उन्हें लीज पर दिया जाएगा।
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अब यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अगर किसी चकौताधारक के पास इससे अधिक भूमि है तो उस भूमि को भी उसे लीज पर दिया जाएगा। इसे शुरू में दस साल की लीज पर दिया जाएगा। इसके लिए सालाना एक बीघा भूमि पर 1000 रुपये का किराया रखा जाएगा। इसे लीज पीरियड के पूरा होने पर रिन्यू करना होगा। यह बढ़ोतरी 10 प्रतिशत के हिसाब से तब तक रहेगी, जब तक इस पर कब्जा होगा।
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अवैध कब्जे को लेकर सुनवाई टली

hp govt big decision on land use in himachal.

वहीं, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण को नियमित करने के राज्य सरकार के वर्ष 2013 के नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई 26 नवंबर के लिए टल गई है। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ ने पूनम गुप्ता और हरदेश आर्य की ओर से दायर याचिका की सुनवाई की।

याचिका में दिए गए तथ्यों के मुताबिक दो जुलाई 2002 को ये नियम प्रदेश सरकार ने जारी किए थे। इन नियमों को जारी करने के पीछे मुख्य उद्देश्य लंबे समय से सरकारी जमीन पर किए गए अवैध कब्जों को नियमित किया जाना था। प्रार्थियों के अनुसार इस तरह की चार लाख बीघा से अधिक भूमि को अवैध तरीके से नियमित कर अवैध कब्जाधारियों को मालिकाना हक दिया जा रहा है।

याचिका में दलील दी गई है कि इस तरह के नियम कानून की दृष्टि ये गलत हैं। अगर भविष्य में ऐसे कब्जों को नियमित किया जाता है तो राज्य सरकार को अपनी सामाजिक जिम्मेवारियों जैसे स्कूलों, अस्पतालों, कॉलेजों और सड़कों के निर्माण के लिए भूमि नहीं बचेगी। हर समय राज्य सरकार को इस उद्देश्य के लिए निजी लोगों से भूमि का अधिग्रहण करना होगा।

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