लोक लुभावने वायदे नहीं कर पाएंगे 'नेताजी'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राज्य सरकार ने जिला परिषद अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और सदस्यों की ओर से की जाने वाली घोषणाओं पर रोक लगा दी है। इसके पीछे दलील दी जा रही है कि ये जन प्रतिनिधि राजनीति चमकाने के लिए कुछ भी घोषणाएं कर देते हैं।
बाद में घोषणाओं पर काम करने के लिए या तो पैसा नहीं होता या उन्हें किसी ओर वजह से सिरे नहीं चढ़ाया जा सकता। ऐसे में सरकार को भी दिक्कत आती है। इन जन प्रतिनिधि को अब किसी भी विकास कार्य को कराने से पहले प्रस्ताव को जनसभा में लाना पड़ेगा।
यहां से अनुमति के बाद ही ये लोग इन कार्यों की जनता में चर्चा कर सकेंगे। प्रदेश सरकार ने इससे पहले जन प्रतिनिधियों के बजट में कटौती भी की है।
इस पर भी लगी रोक
जनप्रतिनिधि अपने वार्डों में स्कूलों और सरकारी विभाग के लिए फर्नीचर उपलब्ध कराने की बात भी नहीं कहेंगे। सरकार इसे अपने स्तर पर करेगी। प्रदेश में अगले वर्ष पंचायतों के चुनाव होने हैं।
ऐसे में ये जनप्रतिनिधि सक्रिय हो गए हैं। महिलाओं के लिए महिला मंडल भवन का निर्माण, वर्षा शालिका बनाने की घोषणाएं की जा रही हैं लेकिन जब इन्हें उक्त स्थान पर बनाने की बात आती है तो जमीन की स्थिति क्लीयर नहीं होती है।
सरकार का मानना है कि इन जनप्रतिनिधियों को जो विकास कार्य करने चाहिए, वे नहीं कर रहे हैं।
क्लीयरेंस के लिए खुद करें मशक्कत
प्रदेश सरकार ने इन जन प्रतिनिधियों को साफ शब्दों में कह दिया है कि जो विकास कार्य करने हैं, उसमें अगर कोई अड़चन हो रही है तो उसे भी इन्हें ही क्लीयर करना होगा। इसमें चाहे फोरेस्ट क्लीयरेंस की बात हो या फिर विभागों से एनओसी की। इसके बाद ही प्रदेश सरकार इन कार्यों के लिए पैसा स्वीकृत करेगी।
जो दिल में आए, कर देते थे घोषणा
पंचायती राज मंत्री अनिल शर्मा का कहना है कि जनप्रतिनिधियों के दिल में जो आए, वह घोषणाएं कर देते हैं। राजनीति चमकाने के लिए ये सब किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ये जन प्रतिनिधि विकास कार्य को कराने से पहले घोषणाएं नहीं कर सकते हैं। जनसभा में प्रस्ताव पारित होने के बाद इसे जनता के बीच डिस्कस किया जा सकता है।