शिक्षा बोर्ड का एक और कारनामा, फेल करने वालों से करा दी री-चेकिंग
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हिमाचल राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड के अफसरों की कार्यप्रणाली गजब की है। जिन शिक्षकों ने पहले जमा दो कक्षा के दो स्कूलों के विद्यार्थियों को गणित परीक्षा में फेल किया, बोर्ड ने उन्हीं शिक्षकों से दोबारा पेपर चेक करवा दिए।
दूसरी बार पेपर चेक होने पर सभी छात्र अच्छे नंबर लेकर पास भी हुए। उच्च शिक्षा निदेशालय के पास शिक्षा बोर्ड की जांच रिपोर्ट ने री-चेकिंग को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस लापरवाही को लेकर शिक्षा बोर्ड के अफसर किसी भी तरह का बयान देने से बच रहे हैं। राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड के उपसचिव परीक्षा शाखा रविंद्र सिंह ठाकुर ने माना कि फेल करने वाले शिक्षकों से ही दोबारा पेपर चेक करवाए गए।
ऐसा क्यों किया गया, इसको लेकर उन्होंने कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दिया। मेधावी छात्रों को फेल करने वाले शिक्षकों ने ओपन स्कूल का प्रश्नपत्र सामने रखकर रेगुलर छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं जांचने की बात कही है।
सवाल उठ रहा है कि जब उत्तर पुस्तिकाओं के बंडल के साथ प्रश्नपत्र भी दिए जाते हैं तो शिक्षकों के पास ओपन स्कूल के प्रश्नपत्र कहां से आ गए? क्या आंखें मूंदकर पेपर जांचे गए और मामला उजागर होने पर ओपन स्कूल के प्रश्नपत्र का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
लापरवाही सुधारने को तैयार नहीं बोर्ड
जिला हमीरपुर में आरटीआई के माध्यम से सामने आए मामले के बाद प्रदेश के अन्य विद्यार्थियों को भी अपने कम अंकों को लेकर शक पैदा हो गया है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. बीएल बिंटा ने प्रदेश के ऐसे छात्रों से री-चेकिंग करवाने की अपील भी की है।
लेकिन शिक्षा बोर्ड अब री-चेकिंग के लिए निर्धारित 15 दिन का समय निकल जाने का तर्क देते हुए ऐसा करने से इंकार कर रहा है। बोर्ड अपनी लापरवाही को सुधारने के लिए तैयार नहीं है।
बड़ा सवाल
जिन शिक्षकों ने पहले छात्रों को फेल किया, क्या दूसरी बार उन्होंने पेपर चेक करने में गंभीरता दिर्खाई होगी? बोर्ड की ऐसी क्या मजबूरी होगी कि इन्हीं शिक्षकों से दोबारा पेपर चेक करवाए गए?