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HP Assembly Session: राजेश धर्माणी बोले- पूर्व मंत्री की पत्नी को प्रवक्ता बनाने को भाजपा सरकार ने बदले नियम

Thu, 19 Dec 2024 06:13 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, तपोवन(धर्मशाला)
अमर उजाला ब्यूरो, तपोवन(धर्मशाला) Published by: Krishan Singh Updated Thu, 19 Dec 2024 06:13 PM IST
सार

 तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि एक पूर्व मंत्री की पत्नी को प्रवक्ता बनाने के लिए भाजपा सरकार ने नियम ही बदल दिए।

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HP Assembly Session: Rajesh Dharmani said- The present govt has a zero tolerance policy against corruption
तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश विधानसभा शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन नियम 67 के तहत लाए गए स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि एक पूर्व मंत्री की पत्नी को प्रवक्ता बनाने के लिए भाजपा सरकार ने नियम ही बदल दिए। इस फैसले से विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ हुआ। उन्हाेंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने उच्च शिक्षा में 60 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त करने वालों को ही गेस्ट टीचर रखने का फैसला लिया है। भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्तमान सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति है। पूर्व की भाजपा सरकार ने भ्रष्टाचार को संरक्षण दिया। कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में हिमाचल में बड़े-बड़े घोटाले हुए। हजार करोड़ रुपये का ऐसा सामान खरीदा गया, जिसका इस्तेमाल ही नहीं किया गया। पेपर लीक हुए। इसकी जांच होनी चाहिए। ठेकेदारों की लड़ाई में उनका नाम घसीटा गया है। 

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आउटसोर्स कंपनी ने सिर्फ सराज के लिए किया काम : चंद्रशेखर
कांग्रेस विधायक चंद्रशेखर ने कहा कि भाजपा सरकार के समय में आउटसोर्स कंपनी ने सिर्फ सराज में काम किया। भर्तियों में भ्रष्टाचार हुआ। जिला मंडी के अन्य क्षेत्रों की अनदेखी की गई। इसे लेकर श्वेतपत्र लाया जाना चाहिए। चंद्रशेखर ने कहा कि उस समय के एक मंत्री ने जरूरत से बहुत अधिक पानी के पाइप खरीदे। ऐसे स्रोतों के नाम पर भी पाइप लिए गए, जिनमें पानी ही नहीं था। कागजों में करोड़ों रुपये की सिंचाई योजनाएं बना दी गईं। इन मामलों की जांच होनी चाहिए। पुलिस भर्ती की स्क्रिप्ट लिखने वाले को गिरफ्तार नहीं किया। यूपी, बिहार से गिरफ्तारियां दिखाकर मामला रफा-दफा कर दिया। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार के समय में अटल हेल्पलाइन ऑन क्ररप्शन ने काम ही नहीं किया। विश्वविद्यालयों में यूजीसी के नियमों के खिलाफ भर्तियां की गईं। सीबीआई जांच को कोई पता नहीं चला।

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पर्यटन निगम के होटलों पर क्यों दिए दो-दो शपथपत्र : विक्रम
भाजपा विधायक बिक्रम सिंह ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि पर्यटन निगम के होटलों को लेकर हाईकोर्ट में दो-दो शपथपत्र क्यों दिए गए। कहा कि पहले शपथपत्र में सरकार ने आर्थिक तंगी की बात कही। होटलों में ऑक्यूपेंसी भी कम बताई। इसके चलते कोर्ट ने 18 होटल बंद करने का फैसला सुनाया। इसके बाद सरकार ने दूसरा शपथपत्र देकर कुछ होटलों को मुनाफे में बता दिया। सरकार जिला कांगड़ा में चार और चंबा में एक होटल को लीज पर देने की तैयारी में है। कांगड़ा के चार होटल नगरोटा के आसपास हैं। पर्यटन निगम के टेंडरों में भी गड़बड़ी हो रही है। उद्योगों से सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। मेडिकल डिवाइस पार्क और बल्क ड्रग पार्क का काम बंद है। अवैध खनन जोरों पर चल रहा है। कांग्रेस नेताओं की गाड़ियां पकड़ी जा रही हैं। अधिकारियों को लंबी छुट्टी पर जाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में पुरस्कार वितरण समारोह के लिए भी अभिभावकाें से पैसा मांगा जा रहा है। 

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धर्मशाला में वन भूमि पर पेट्रोल पंप खोलने के मामले की हो जांच : सुधीर
भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने कहा कि धर्मशाला में वन भूमि पर पेट्रोल पंप खोलने के मामले की जांच होनी चाहिए। गेस्ट टीचर को रखने से बेरोजगारों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है। नादौन में एचआरटीसी को बेची गई भूमि के मामले में दो ही लोगों के नाम बताए गए हैं, तीसरे व्यक्ति की पहचान भी उजागर करनी चाहिए थी। तीसरा व्यक्ति वही है, जिसके ठिकानों पर बीते दिनों छापामारी हुई थी। सुधीर ने कहा कि समोसा, टायलेट सेस और जंगली मुर्गें जैसे मुद्दे सरकार ने खुद बनाए हैं। खनन माफिया प्रदेश में पूरी तरह से सक्रिय है। कांगड़ा जिला में चिट्टा माफिया लगातार पैर पसरा रहा है। सरकारी ट्रेजरी एक माह से बंद है। ठेकेदारों को पेमेंट नहीं हो रही। जंगली मुर्गें के मामले पर एफआईआर दर्ज कर आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों से पूरे देश में हिमाचल की छवि खराब हो रही है।

करोड़ों रुपये की भूमि खरीदने वाले व्यक्ति की हो जांच : सुरेश
विधायक सुरेश कुमार ने कहा कि कांगड़ा जिला में एक नेक राम सुपुत्र गीता राम है। इस व्यक्ति ने 7,54,6000 रुपये की जमीनें खरीद ली हैं। उसके पास इतना पैसा कहां से आ रहा है, इसका किसी को भी पता नहीं है। इसकी जांच होनी चाहिए कि उसके पीछे कौन व्यक्ति है, क्योंकि एक गरीब व्यक्ति इतना पैसा नहीं लगा सकता और न ही इतनी जमीन खरीद सकता है। उसके पीछे भी कोई बड़ा नेता है, जो पैसा लगा रहा है। एक व्यक्ति की 20 अप्रैल 2014 को धर्मशाला में जलकर मौत हो गई। उसका छोटा सा खोखा था। उसमें रात को आग लगी और वह जलकर मर गया। उसकी न कोई जांच हुई और न ही कोई एफआईआर। उस शेड के नजदीक भाजपा के एक नेता का घर है। इसमें शंका है कि वह व्यक्ति जमीन नहीं दे रहा था, कहीं इसलिए तो नहीं उसका शेड जला दिया गया? आज जमीनों के ऊपर बात चली है। इसलिए इसकी भी जांच कर ली जाए। 

रायजादा के लोन की सेटलमेंट पॉलिसी भाजपा के समय की आई : सुक्खू
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि कोई अपने आप वन टाइम सेटलमेंट पॉलिसी नहीं ला सकता है। ऊना के पूर्व विधायक सतपाल रायजादा के लोन की सेटलमेंट पॉलिसी भाजपा के समय की लाई गई। सीएम ने भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती को जानकारी दी कि उनका लोन वन टाइम पॉलिसी के तहत सेटल हुआ है। स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए सत्ती ने कहा कि उन्होंने मुद्दा उठाया है कि वन टाइम सेटलमेंट पॉलिसी उनके लिए आनी चाहिए, जिनकी संपत्ति कुर्क होने की नौबत आए। पूर्व विधायक ने जो हलफनामा दिया, उसमें उनकी संपत्ति 10 करोड़ रुपये की थी। अनुराग ठाकुर के साथ जब चुनाव लड़ा तो उनकी संपत्ति 15 करोड़ रुपये हो गई। एक महिला का मामला इसलिए सेटल नहीं हो रहा है कि वन टाइम पॉलिसी में संपत्ति कर्ज की राशि के ढाई गुना से ज्यादा न हो।

उन्होंने कहा कि रायजादा वाले मामले में ऐसा नहीं था। इस पर सत्ती ने कहा कि सीएम इस मामले में न पड़ें। दो करोड़ 82 लाख रुपये के लोन को सेटल करने का हिसाब दें। कोई ऐसी मशीन तो नहीं है कि एक ओर से आलू मशीन में डालो तो दूसरी ओर सोना निकले। मुख्यमंत्री ने कहा - कहां से क्या हुआ आयकर वाले खुद पीछे पड़ जाते हैं। संपत्ति पैसे में नहीं बढ़ी, काइंड्स में बढ़ी है। इनके पास होटल वगैरह हैं। सुक्खू ने कहा कि केसीसी बैंक ने वन टाइम सैटलमेंट पालिसी 9 सितंबर 2012 से 9 सितंबर 2023 तक शुरू की गई। इसी पॉलिसी के तहत पूर्व विधायक सतपाल रायजादा ने 6 सितंबर 2023 की एप्लिकेशन दी। उनके दो खाते में एक का क्लोजर 5 दिसंबर 2023 को हुआ, जबकि दूसरे का 6 दिसंबर 2023 को हुआ। इस पॉलिसी के कारण बैंक का 207 करोड़ रुपए एनपीए कम हुआ, जो 1247 करोड़ से घटतक 1040 करोड़ रुपये रह गया और 7262 एनपीए अकाउंट कम हुए।

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