दो मंजिला मकान जलकर राख, जीवन भर की कमाई भी मिट्टी
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हिमाचल प्रदेश जिला शिमला के चौपल की ग्राम पंचायत बमटा के रुपाड़ी गांव में आग लगने से दो मंजिला मकान जलकर राख हो गया। घर के आठ कमरों सहित उसमें रखा सारा सामान भी आग की भेंट चढ़ गया। अग्निकांड से करीब 30 लाख के नुकसान का अनुमान है। हालांकि आग लगने का कारणों का पता नहीं चल पाया।
प्रशासन की ओर से प्रभावितों को दस-दस हजार रुपये कर राहत दी गई है। जानकारी के अनुसार मंगलवार सुबह पांच बजे घर में आग लगी। उस समय दोनों परिवार के सभी सदस्य सोये थे। अचानक धुआं कमरे में आने पर किसी की नींद खुली और अन्य लोगों को भी जगाया। लकड़ी का घर पलभर में आग से जलकर राख हो गया।
प्रभावित परिवार ने निचली मंजिल की गौशाला में बांधे मवेशियों को मुश्किल से बचाया। इसके अलावा उनके पास कुछ नहीं रहा। अग्निकांड से मंगत राम पुत्र सनिया राम, रमेश कुमार पुत्र मंगत राम निवासी रुपाड़ी के मकान जल गए। ग्रामीणों ने पुलिस थाना चौपाल से संपर्क करने की कोशिश की। लेकिन फोन खराब होने के कारण समय पर पुलिस से संपर्क नहीं हो सका।
सड़क संकरी होने के कारण दमकल वाहन भी मौके पर नहीं पहुंच सका। गांव के लोग भी आग को काबू नहीं कर सके। एसडीएम मुकेश रिप्सवाल ने कहा कि कानूनगो ओम प्रकाश शर्मा ने मौके पर पहुंचकर प्रभावित परिवारों को दस-दस हजार बतौर फौरी राहत प्रदान की है। तहसीलदार चौपाल को नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा अभी तक आग से करीब 30 लाख के नुकसान का अनुमान है। सूचना के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची। डीएसपी चौपाल संतोष शर्मा ने मामले की पुष्टि की। कहा कि आग लगने के कारणों का पता नहीं चला। पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
जीवन भर की कमाई मिट्टी में मिल गई
ग्राम पंचायत बमटा के रुपाड़ी गांव में आग ने दो परिवारों की जीवन भर की कमाई मिट्टी में मिला दी। आंखों के सामने कुछ ही समय में आठ कमरे और सारा सामान जल गया। अपने आशियाने को आग में जलता देख प्रभावितों की आंखें नम हो गई। गनीमत रही कि आग लगने का पता समय पर लग सका। ऐसे में एक बड़ा हादसा होने से टल गया।
मंगत राम व रमेश का कहना है कि मकान के कमरे में धुआं फैला था। धुएं से घुटन होने लगी तो बाहर देखने पर पता चला कि घर में आग लग चुकी है। उन्होंने परिवार के सदस्यों को जगाया और बाहर निकाला। आनन फानन में गोशाला में बांधे मवेशियों को बाहर निकाला। जब तक पशुओं को बचाया तब तक पूरा घर आग की चपेट में आ गया था।
स्थानीय ग्रामीणों ने पानी की पाइपों से आग बुझाने की कोशिश की, जो सफल नहीं हुई। प्रभावितों को अब दूसरे लोगों के घरों में आश्रय लेना पड़ रहा है। दोनों परिवार के लोग अपने जूते तक नहीं बचा सके।
आग लगने का पता चलने पर सभी लोग नंगे पांव मवेशियों को बचाने के लिए बाहर दौड़ पड़े। प्रभावितों को समझ नहीं आ रहा कि प्रशासन की ओर से दी गई दस हजार की राहत राशि से क्या खरीदें और क्या नहीं। गांव के लोगों ने प्रभावित परिवारों को राशन, तिरपाल, कपडे़, बर्तन, बिस्तर व अन्य राहत सामग्री प्रदान करने की मांग की है।