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विशेषज्ञों ने दी सलाह: बगीचों में तौलिए बनाएं बागवान, किसान सब्जी की पौध लगाएं
Mon, 28 Dec 2020 06:47 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 28 Dec 2020 06:47 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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दिसंबर अंत की बर्फबारी और बारिश बागवानी-कृषि के लिए संजीवनी मानी जा रही है। बागवानी के विशेषज्ञों के अनुसार सेब के पेड़ों को जरूरत की कड़ाके की ठंड (चिलिंग ऑवर्स) मिलनी शुरू हो गई है। बागवानों को सलाह दी गई है कि बगीचों में तौलिए बनाने के काम में जुट जाएं। किसान खेतों में खाद डालें और सब्जी की पौध की रोपाई का काम शुरू कर दें।
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बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज कहते हैं कि अभी तक सूखे के कारण तापमान नीचे नहीं जा रहा था। इस बार बिखरे रूप से बर्फबारी और बारिश हुई है। इससे बगीचों को अच्छी बर्फ मिली है। इस बर्फबारी के बाद से चिलिंग ऑवर्स भी शुरू हो गए हैं। अब बागवानों को बगीचों में तौलिए बनाने के काम में जुट जाना चाहिए।
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इस बार की बर्फ से पेड़ों पर वूली एफिड और कैंकर जैसे रोगों का हमला नहीं होगा। दिसंबर में कई बागवानों ने प्रूनिंग का काम कर लिया है। अगर मजबूरी है तो इस समय प्रूनिंग कर सकते हैं। अन्यथा प्रूनिंग यानी काटछांट का कार्य जनवरी अंत या फिर फरवरी में कर सकते हैं। बगीचों में खाद डालनी है तो गोबर की खाद ही डालें। अन्य खादें मार्च में ही डालें।
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दूसरी ओर, राज्य के कृषि निदेशक डॉ. नरेश कुमार बधान कहते हैं कि दिसंबर अंत की बारिश फसलों के लिए लाभकारी है। किसान खाद डाल सकते हैं। इसके अलावा फसलों पर दवाओं का स्प्रे भी कर लें। सब्जी के पौधों की रोपाई का काम कर सकते हैं। किसान खेतों में पिछेता किस्मों की फसलों की बिजाई भी कर सकेंगे।