फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   horticulture news: apple carton costlier by five to 10 rupees in himachal pradesh

बागवानी: एक लाख से अधिक बागवान परिवारों को झटका, सेब कार्टन पांच से 10 रुपये महंगा

Tue, 22 Jun 2021 05:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 22 Jun 2021 05:00 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पाद विधायन एवं विपणन निगम (एचपीएमसी) ने दाम तय कर दिए हैं। प्रति बीस किलो के सफेद कार्टन की दरें 60 से 70 रुपये निर्धारित की गई हैं। ब्राउन कागज के कार्टन 54 से 62 रुपये में बागवानों को मिलेंगे। 

विज्ञापन
horticulture news: apple carton costlier by five to 10 rupees in himachal pradesh
सेब कार्टन(फाइल) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में जुलाई में शुरू होने वाले सेब सीजन से पहले एक लाख से ज्यादा बागवान परिवारों को झटका लगा है। बागवानी मंत्री ने कोरोना काल में सेब कार्टन के दाम न बढ़ाने का आश्वासन दिया था लेकिन कंपनियों ने कच्चा माल और कागज महंगा होने की दलील देकर कार्टन के दाम पांच से 10 रुपये तक बढ़वा लिए हैं। 

विज्ञापन


 लंबी कसरत के बाद सोमवार को हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पाद विधायन एवं विपणन निगम (एचपीएमसी) ने दाम तय कर दिए हैं। प्रति बीस किलो के सफेद कार्टन की दरें 60 से 70 रुपये निर्धारित की गई हैं। ब्राउन कागज के कार्टन 54 से 62 रुपये में बागवानों को मिलेंगे। 
विज्ञापन


पिछले साल कंपनियों ने सफेद कार्टन 55 से 60 रुपये और ब्राउन कार्टन 47 से 58 रुपये में उपलब्ध कराया था। हालांकि, सेब पैकिंग की सौ ट्रे का बंडल इस बार भी 550 रुपये में ही बेचा जाएगा। पिछले साल एचपीएमसी ने 350 लाख कार्टन उपलब्ध कराए थे। एचपीएमसी ने इस बार 17 कंपनियों को कार्टन आपूर्ति का काम सौंपा है। पिछले साल 24 कंपनियों ने कार्टन बेचा था। पिछले साल कार्टनों के रेट में कोई वृद्धि नहीं की थी। 
विज्ञापन
विज्ञापन


17 कंपनियों को कार्टन आपूर्ति का काम सौंपा गया है। इस बार कार्टन के रेट पांच से 10 रुपये बढ़े हैं। कंपनियों का कहना है कि कच्चा माल खासकर कागज महंगा हुआ है। - राजेश्वर गोयल, एचपीएमसी के प्रबंध निदेशक  

चार करोड़ पेटी सेब उत्पादन की उम्मीद 
पिछले साल सेब की फसल कम थी। इस साल करीब चार करोड़ पेटी सेब होने का अनुमान है, जो अच्छा माना जा रहा है। हालांकि, सीजन शुरू होने पहले प्रदेश के सेब उत्पादकों को बर्फबारी और ओलों की मार भी पड़ चुकी है। इससे काफी नुकसान उठाना पड़ा है।

इस बार ट्रक भाड़ा भी बढ़ेगा
डीजल महंगा होने के कारण अब ट्रक मालिक सेब की ढुलाई का भाड़ा 15 फीसदी तक बढ़ाने की तैयारी में है। कोटखाई ट्रक मालिक यूनियन के अध्यक्ष प्रताप चौहान कहते हैं कि तीन साल से भाड़ा नहीं बढ़ा है। 

बागवान बोले- क्रेट में सेब बेचने की व्यवस्था फायदेमंद, पर पुख्ता तैयारी करे प्रदेश सरकार

 सेब सीजन के दौरान प्रदेश की 5 मंडियों में क्रेट में सेब बेचने की सरकार की घोषणा को शिमला जिले के बागवानों ने फायदेमंद करार दिया है। साथ ही इसके लिए पुख्ता तैयारियां करने की मांग उठाई है। बागवानों का कहना है कि सरकार को सब्सिडी पर क्रेट उपलब्ध करवानी चाहिए और मंडियों में भी इसके लिए जरूरी इंतजार होने चाहिए। टिक्कर शरौंथा के बागवान दीपक चौहान का कहना है कि कार्टन की जगह क्रेट में सेब बेचने पर लेबर का खर्चा आधा रह जाएगा।

जो बागवान सालाना लेबर पर दो लाख खर्च करते हैं उन्हें एक लाख ही खर्च करना पड़ेगा लेकिन सरकार को यह व्यवस्था लागू करने के लिए सभी जरूरी तैयारियां करनी चाहिए। कोटखाई हिमरी बड़ोग के बागवान सुनील शर्मा का कहना है कि क्रेट में सेब बेचने की व्यवस्था छोटे और मझोले बागवानों के लिए फायदेमंद है। ऐसा होने से खर्चा बचेगा और उपज के सही दाम भी मिलेंगे। कोटखाई के बागवान राजेश मेहता का कहना है कि सरकार का यह निर्णय बागवानों के हित में है लेकिन सरकार को इसके लिए पुख्ता इंतजाम भी करने होंगे।

बागवानों को अनुदान पर क्रेट उपलब्ध करवाई जानी चाहिए। सीजन के दौरान लेबर की समस्या से भी छुटकारा मिलेगा। कोटखाई के बागा निवासी बागबान नीरज ठाकुर का कहना है कि मौजूदा समय में बड़े बागवानों को मंडियों में अच्छे दाम मिलते हैं जबकि छोटे भगवानों को उतना फायदा नहीं होता।  क्रेट में सेब बिकने पर वजन के हिसाब से पैसा मिलेगा। छैला बनाहर के युवा बागवान विशाल वेक्टा का कहना है कि कुल्लू में पिछले कई सालों से क्रेट में ही सेब बिकता है।

क्रेट में सेब की पैकिंग आसान है। क्रेट में प्लास्टिक की ट्रे लगाकर ईरान से भी भारत में सेब आयात होता है। बखोल कोटखाई के बागवान मनोज चौहान का कहना है कि क्रेट में सेब बिकने पर लेबर का खर्चा बचेगा। मंडी में ताजा माल पहुंचने से बागवानों को बढ़िया रेट मिलेंगे। सरकार को क्रेट में सेब बेचने को लेकर सभी जरूरी इंतजाम तुरंत करने चाहिए।

आढ़ती एसोसिएशन के मुख्य सलाहकार अनुपाल चौहान का कहना है कि क्रेट में सेब बेचना बागवान, आढ़ती और खरीददार तीनों के हित में है। बागवानों का 200 से 300 रुपये प्रति पेटी खर्चा बचेगा। मंडियों में माल की खरीद फरोख्त में पारदर्शिता आएगी। खरीदार को स्टोर की जरूरत नही पड़ेगी। सरकार को जल्द से जल्द क्रेट में सेब बेचने की व्यवस्था लागू करनी चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed