बागवानी और सिंचाई योजनाओं का एक साथ चलेगा काम, खर्च होंगे पांच हजार करोड़ से ज्यादा
हिमाचल सरकार बागवानी विकास और सिंचाई प्रोजेक्टों का काम साथ चलाएगी। सिंचाई योजनाओं की मरम्मत का काम भी प्रमुखता से होना है।
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विश्व बैंक की 1134 करोड़ के बागवानी विकास प्रोजेक्ट को सफलता से चलाने के लिए सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना अनिवार्य है। वर्तमान समय में बागवानी विकास के प्रोजेक्ट को चलाने के लिए बागवानों को सिंचाई सुविधा देने के लिए तकनीकी स्टाफ उपयुक्त संख्या में मौजूद नहीं है। इस कारण से सरकार जल शक्ति विभाग के तकनीकी स्टाफ की मदद से सिंचाई योजनाओं पर काम करने का फैसला लिया है।
वर्तमान में प्रदेश में 4751 करोड़ की सिंचाई परियोजना पर काम होना है। सिंचाई योजनाओं की मरम्मत का काम भी प्रमुखता से होना है। पुराने पेयजल योजनाओं की खस्ताहाल पाइप लाइन भी बदली जानी है। सिंचाई योजनाएं की पाइप लाइनों की हालत अच्छी नहीं है। पिछले कई साल से नई पाइपों की खरीद नहीं की गई। इन पाइपों को भी बदला जाना है।
बागवानी विकास पर वर्तमान समय में कुल 788 करोड़ व्यय होने हैं
बागवानी विकास पर वर्तमान समय में कुल 788 करोड़ व्यय होने हैं। इन प्रोजेक्ट के तहत बागवानों को नई वैरायटी के सेब पौधे उपलब्ध कराए जाने हैं। इसके अलावा बागवानी की आधुनिक तकनीक के साथ सिंचाई सुविधा भी देनी है। दोनों विभागों का आपसी तालमेल बैठाकर प्रोजेक्ट में काम किया जाना है। बागवानी विभाग में सिंचाई योजनाएं के लिए तकनीकी स्टाफ की कमी की समस्या को दूर करते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है।
जल शक्ति विभाग और बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि बागवानी विकास प्रोजेक्ट को चलाने के लिए सिंचाई योजनाओं की अहम भूमिका है। सिंचाई योजनाओं के लिए तकनीकी स्टाफ जल शक्ति विभाग के पास है। 1134 करोड़ की बागवानी विकास प्रोजेक्ट में सिंचाई योजनाओं पर भी काम होना है। इस कारण से बागवानी विभाग और जल शक्ति विभाग प्रोजेक्ट में एक साथ काम करेंगे। तय लक्ष्य के भीतर प्रोजेक्टों का काम किया जाना है।