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कैग रिपोर्ट में खुलासा: हिमाचल में मनरेगा के फंड से बना दिए 180 पंचवटी पार्क, 15.75 करोड़ खर्चे

Sat, 05 Sep 2026 09:56 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 05 Sep 2026 09:56 AM IST
सार

 मनरेगा के तहत विकास कार्यों के लिए उपलब्ध केंद्रीय धन के इस्तेमाल में नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया है।  भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की वर्ष 2023-24 की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि राज्य में मनरेगा की राशि का इस्तेमाल पंचवटी योजना के तहत पार्क बनाने में किया गया।

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CAG report reveals: 180 Panchvati Parks built in Himachal using MGNREGA funds; ₹15.75 crore spent.
कैग रिपोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में मनरेगा के तहत विकास कार्यों के लिए उपलब्ध केंद्रीय धन के इस्तेमाल में नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की वर्ष 2023-24 की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि राज्य में मनरेगा की राशि का इस्तेमाल पंचवटी योजना के तहत पार्क बनाने में किया गया। 180 स्थानों पर बनाए गए इन पार्कों पर कुल 15.75 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इनमें से 4.41 करोड़ रुपये के खर्च को कैग ने अमान्य करार दिया है।

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मनरेगा अधिनियम में योजना के तहत कराए जा सकने वाले कार्यों की सूची निर्धारित है। पंचवटी पार्क इस स्वीकृत सूची में शामिल नहीं थे। प्रदेश में इनका निर्माण मनरेगा के तहत कराया गया। इसके लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय से पूर्व अनुमति व किसी तरह की छूट भी नहीं ली गई। रिपोर्ट में केंद्रीय योजना की राशि को राज्य सरकार की अपनी प्राथमिकता वाली योजना पर खर्च किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। पंचवटी योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना था।

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इसके तहत पार्कों में वॉक-वे, बैठने की व्यवस्था, ओपन जिम और हरित क्षेत्र विकसित किए जाने थे। औषधीय पौधों के रोपण की भी व्यवस्था की गई। योजना की मंशा जनहित से जुड़ी होने के बावजूद इसके लिए केंद्रीय मनरेगा फंड के इस्तेमाल की प्रक्रिया पर कैग ने आपत्ति जताई है। ऑडिट में यह भी सवाल उठाया गया है कि जब कार्य मनरेगा की स्वीकृत सूची में शामिल नहीं थे तो जिला और राज्य स्तर पर इनके लिए धनराशि जारी करने की अनुमति कैसे दी गई। इससे विभागीय स्तर पर वित्तीय निगरानी और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं।

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