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हिमाचल: अमेरिकी कोयला डेढ़ गुना महंगा होने से प्रदेश में बढ़ेंगे ईंट के दाम

Mon, 21 Feb 2022 11:08 AM IST
अरविन्द ठाकुर सतीश शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, नारी (ऊना)
सतीश शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, नारी (ऊना) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 21 Feb 2022 11:08 AM IST
सार

ईंट के दाम बढ़ने का मुख्य कारण इसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कोयले के दाम बढ़ना माना जा रहा है। अधिकतर भट्ठा मालिक ईंट को पकाने के लिए अमेरिका से आयात किए जाने वाले कोयले का ही इस्तेमाल करते हैं। दो महीने पहले कोयले की कीमत 15 हजार रुपये प्रति टन थी। अब यह 25 हजार रुपये प्रति टन पड़ रहा है।

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Homes get costlier building material  Bricks price hike by two thousand rupee
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विस्तार

घर बनाना अब और महंगा होने वाला है। आम आदमी अभी सीमेंट, सरिये की बढ़ी कीमतों के झटके से उबर नहीं पाया था कि अब ईंटों के दामों में भी आग लगने वाली है। बताया जा रहा है कि 15 दिन बाद प्रति हजार ईंट की कीमत 1500 से 2000 रुपये तक बढ़ जाएगी। इस समय ईंट 6500 रुपये प्रति हजार के हिसाब से मिल रही है। आने वाले दिनों में आठ से नौ हजार के बीच बिकेगी। ईंट की कीमत में अचानक होने जा रही बढ़ोतरी लोगों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रही है।

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दरअसल, ईंट के दाम बढ़ने का मुख्य कारण इसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कोयले के दाम बढ़ना माना जा रहा है। अधिकतर भट्ठा मालिक ईंट को पकाने के लिए अमेरिका से आयात किए जाने वाले कोयले का ही इस्तेमाल करते हैं। दो महीने पहले कोयले की कीमत 15 हजार रुपये प्रति टन थी। अब यह 25 हजार रुपये प्रति टन पड़ रहा है। अमेरिका से आ रहे इस कोयले की गुणवत्ता भारत में मिलने वाले कोयले के बेहतर बताई जाती है। इसके मुकाबले भारत के झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल आदि राज्यों से आने वाले कोयले की गुणवत्ता कम मानी जाती है।
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15 दिन में आएगी कोयले की नई खेप
आने वाले 15 दिन में अमेरिका से बढ़ी कीमतों के साथ कोयले की नई खेप भट्ठों में पहुंच जाएगी। यह खेप पहले गुजरात पहुंचेगी। उसके बाद क्षेत्र के ईंट भट्ठों को सप्लाई की जाएगी। बताया जा रहा है कि ईंट भट्ठों पर साल में दो सीजन में काम चलता है। एक सीजन में अच्छी गुणवत्ता वाले कोयले की 500 से 600 टन के बीच खपत होती है।
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आयात होने वाले कोयले के रेट कम करे सरकार
क्षेत्र के भट्ठा मालिकों रविंद्र गुप्ता, सोमनाथ चौधरी, प्रकाश चंद, दिलबाग सिंह, पंकज कुमार तथा अश्विनी कुमार ने बताया कि ईंट की कीमत साढ़े छह हजार से नौ हजार तक पहुंचने पर बिक्री कम होना तय है। कोयले की बढ़ी कीमतों से खामियाजा उनके साथ लोगों को भी भुगतना पड़ेगा। ईंट भट्ठा एसोसिएशन के प्रधान पहू लाल भारद्वाज ने बताया कि सरकार विदेश से आयात होने वाले कोयले का दाम कम करने के लिए कदम उठाए। 


सीमेंट व सरिया के भाव भी चढ़े 
करीब डेढ़ माह पूर्व एसीसी सीमेंट प्रति बोरी 410 रुपये, अल्ट्राटेक व अंबुजा सीमेंट 412 रुपये प्रति बोरी बिक रहा था। अब एसीसी सीमेंट प्रति बोरी 422 रुपये, अल्ट्राटेक व अंबुजा सीमेंट प्रति बोरी 424 रुपये बिक रहा है। सरिया डेढ़ माह पहले 5700 रुपये प्रति क्विंटल था, जो अब 6200 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है।

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