{"_id":"69a5c1367ae7688f780c39ec","slug":"holi-2026-the-historic-hola-mohalla-festival-in-paonta-sahib-is-associated-with-the-tenth-sikh-guru-learn-it-2026-03-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Holi 2026: पांवटा साहिब में सिखों के दसवें गुरु से जुड़ा ऐतिहासिक होला मोहल्ला पर्व, पढ़ें रोचक जानकारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Holi 2026: पांवटा साहिब में सिखों के दसवें गुरु से जुड़ा ऐतिहासिक होला मोहल्ला पर्व, पढ़ें रोचक जानकारी
Tue, 03 Mar 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh
सुरेश तोमर, संवाद न्यूज एजेंसी, पांवटा साहिब (सिरमौर)।
सुरेश तोमर, संवाद न्यूज एजेंसी, पांवटा साहिब (सिरमौर)।
Published by: Krishan Singh
Updated Tue, 03 Mar 2026 05:00 AM IST
सार
गुरु गोविंद सिंह पांवटा साहिब में करीब साढ़े चार वर्ष तक रहे हैं। सिरमौर के राजा मैदिनी प्रकाश के निमंत्रण पर जनपद में पहुंचे थे।
विज्ञापन
गुरु गोविंद सिंह के अस्त्र-शास्त्र गुरुद्वारा श्री पांवटा साहिब में संजो कर रखे हैं।
- फोटो : संवाद
विस्तार
दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह पांवटा साहिब में करीब साढ़े चार वर्ष तक रहे हैं। सिरमौर के राजा मैदिनी प्रकाश के निमंत्रण पर जनपद में पहुंचे थे। सबसे खास बात ये है कि दशम गुरु यमुना नदी के तट पर रहे। पांवटा साहिब के प्रवास को उनके जीवन काल का सबसे शांत और रचनात्मक समय माना जाता है। गुरु की नगरी पांवटा साहिब में आज तक भी दशम गुरु से जुड़े ऐतिहासिक होला मोहल्ला को पिछले 342 वर्षों से संजोए हुए हैं। गुरुद्वारा प्रबंधन समिति उपाध्यक्ष हरभजन सिंह ने बताया कि 1685 ई. में सिरमौर के राजा मैदिनी प्रकाश के निमंत्रण पर दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह सिरमौर पहुंचे। करीब साढ़े चार वर्ष तक यमुना किनारे रहे।
विज्ञापन
भगानी साहिब की लड़ाई में जीत हासिल की। उन्होंने खुद पांवटा साहिब शहर की नींव रखी। इसलिए आज भी गुरु की नगरी के नाम से जाना जाता है। होला मोहल्ला पर्व को 342 वर्षों से मनाया जा रहा है। महासचिव हरप्रीत सिंह रतन ने कहा कि होला मोहल्ला की शुरुआत दशम गुरु ने 17वीं शताब्दी के अंत में की थी। इस बार 342वां होला मोहल्ला उत्सव पांवटा साहिब में मनाया जा रहा है। 28 फरवरी से शुरु कार्यक्रम 4 मार्च तक चलेंगे। गुरुद्वारा प्रबंधक जगीर सिंह और सह प्रबंधक गुरमीत सिंह ने कहा कि होला मोहल्ला पर सोमवार को नगर कीर्तन के साथ मंगलवार को पूर्णिमा के दिन कवि दरबार सजेगा। ये परंपरा भी दशम गुरु ने ही शुरु की थी।
विज्ञापन