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हिंदी साहित्य सम्मेलन में साहित्यकारों ने किया एक राष्ट्र और एक भाषा विषय पर मंथन
Sat, 29 Feb 2020 08:03 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, सोलन
अमर उजाला नेटवर्क, सोलन
Published by: Krishan Singh
Updated Sat, 29 Feb 2020 08:03 PM IST
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सोलन में हिंदी साहित्य सम्मेलन
- फोटो : अमर उजाला
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संस्कृत कॉलेज सोलन में हिंदी साहित्य सम्मेलन का 72वां अधिवेशन कार्यक्रम दूसरे दिन भी जारी रहा। इस दौरान तीन सत्र हुए। पहला सत्र साहित्य परिषद पर आधारित रहा। इसमें हिमाचल की साहित्य संपदा पर साहित्यकारों ने अपने वक्तव्य प्रस्तुत किए। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित प्रो. केशव शर्मा मुख्य अतिथि थे। सभापति के रूप में माधव कौशिक संयोजक प्रो. रामकिशोर शर्मा भी विशेष रूप से मौजूद रहे।
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उन्होंने प्रदेश की साहित्य संपदा पर जानकारी दी। खासतौर पर सोलन शिमला एवं सिरमौर में होने वाले करियाला नृत्य के बारे में बताया। इसी सत्र में महाविद्यालय के व्याकरणाचार्य डॉ. अजय भारद्वाज ने हिमाचल के ऋषि मुनियों पर विचार रखे। उन्होंने बताया कि किस प्रकार ऋषियों के नाम पर हिमाचल के दिव्य स्थानों के नाम पड़े हैं। जैसे मनु के नाम पर मनाली का नाम पड़ा है। अन्य वक्ताओं ने भी विचार रखे।
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सत्र में डॉ. कृष्ण मोहन पांडे, डॉ. इंदर ठाकुर, डॉ. नरेश शर्मा, डॉ. ओम प्रकाश शर्मा, डॉ. भवानी ठाकुर, डॉ. रोशन शर्मा, डॉ. प्रेम लाल गौतम, डॉ. अशोक गौतम सहित करीब 30 साहित्यकारों ने विचार रखे। दूसरे सत्र का मुख्य विषय एक राष्ट्र एक भाषा रहा। इसमें प्रो. योगेंद्र नाथ शर्मा, डॉ. शिव भारद्वाज सहित अन्य 34 वक्ताओं ने विचार रखे।
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बताया कि किस प्रकार हिंदी को आज एक राष्ट्रभाषा बनाना हमारे लिए चुनौती है। हमारी पीढ़ी अपनी ही मातृ भाषा को पहचानने में असमर्थ है। महात्मा गांधी के अनेक प्रयासों के बावजूद हिंदी भाषा राष्ट्र भाषा न बन पाई। अधिवेशन के तृतीय सत्र में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें तीन दर्जन कवियों ने अपनी कविताओं से सबको मनमोहित किया।