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सिरमौर: हिंदी की अलख जगाने के लिए शिक्षक ने बनाईं 15 लघु शैक्षणिक फिल्में

Sun, 22 Aug 2021 05:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, नाहन (सिरमौर)
अमर उजाला नेटवर्क, नाहन (सिरमौर) Published by: Krishan Singh Updated Sun, 22 Aug 2021 05:00 AM IST
सार

वनस्पति विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान व पत्रकारिता एवं जनसंचार में एमएससी डॉ. संजीव अत्री अब तक 15 लघु शैक्षणिक फिल्में बना चुके हैं। निर्माता निर्देशक के साथ उन्होंने पटकथा लेखक के तौर पर भी कार्य किया। ये सभी लघु फिल्में विशुद्ध हिंदी में तैयार की गई हैं।

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Hindi Hai Hum abhiyan: Teacher made 15 short educational films to awaken the light of Hindi
मुख्याध्यापक डॉ. संजीव अत्री - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के नाहन में नौरंगाबाद विद्यालय के मुख्याध्यापक डॉ. संजीव अत्री हिंदी की अलख जगाने में जुटे हैं। वनस्पति विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान व पत्रकारिता एवं जनसंचार में एमएससी डॉ. संजीव अत्री अब तक 15 लघु शैक्षणिक फिल्में बना चुके हैं। निर्माता निर्देशक के साथ उन्होंने पटकथा लेखक के तौर पर भी कार्य किया। ये सभी लघु फिल्में विशुद्ध हिंदी में तैयार की गई हैं। डॉ. संजीव का मानना है कि विज्ञान जैसे विषय पर फिल्में बनाने के लिए हिंदी से अधिक संपूर्ण व श्रेष्ठ तकनीकी की कोई भाषा नहीं है।

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मनोरंजन का वही साधन सर्वाधिक आनंदमय है, जो शीघ्रता से मस्तिष्क में उतरे। बता दें कि संजीव अत्री ने 1987 में प्रतिबिंब नामक लघु फिल्म तैयार की। अब तक वह शैल तरंग, पुनरोदय, गुड़, अजान, अंतरंग, चेहरा, नई हवा, नया जीवन, चेतना व आधा रंग जैसी फिल्में बना चुके हैं। इसके अलावा अंग्रेजी शीर्षक में तैयार की गईं टूमोरो में बी द फेटल डे और लिसन द नेचर इज क्राइंग हियर फिल्में भी हिंदी में बनी हैं। शैक्षणिक व सांस्कृतिक फिल्म निर्माता डॉ. संजीव अत्री ने बताया कि हिंदी भाषा का प्रयोग सिनेमा के सात तत्वों विचार, कथा, पटकथा, फिल्मांकन, अभिनय, संगीत व संपादन को सबसे अधिक प्रभावपूर्ण रूप में प्रस्तुत कर सकता है।
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विज्ञान, पर्यावरण व संस्कृति जैसे गूढ़ विषयों पर फिल्म बनाते हुए अनुभव किया गया कि विशुद्ध हिंदी का प्रयोग फिल्म की कलात्मकता, भावनात्मक लय व विषयवस्तु के प्रवाह को गति देता है। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा फिल्मों को राष्ट्रीय धारा, सामाजिक विषयों व सामयिक परिवर्तनों से जोडने की सर्वश्रेष्ठ भाषा है। डॉ. अत्री ने बताया कि अपनी बनाई हुई फिल्मों के नामकरण में उन्होंने स्वयं हिंदी भाषा की क्षमता को अनुभव किया है। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा व्याकरणीय व तकनीकी आधार पर एक संपूर्ण भाषा है।

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