Himachal Weather: बारिश से मची तबाही, 302 सड़कें और 1184 बिजली ट्रांसफार्मर ठप, प्रदेश में ऑरेंज अलर्ट
प्रदेश में 302 सड़कें भी बाधित चल रही हैं। 1,184 बिजली के ट्रांसफार्मर और 26 पेयजल योजनाएं भी ठप हैं। कालका-शिमला एनएच छह घंटे बंद रहा।
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हिमाचल प्रदेश में शुक्रवार रात और शनिवार को बारिश से एक बार फिर भारी तबाही मची है। मंडी की सुकेती खड्ड में बाढ़ आने से बल्ह घाटी में जलभराव हो गया है। उधर, कांगड़ा जिले में ब्यास नदी में बने पौंग बांध के गेट खोलने पड़े।
वहीं, मंडी-कुल्लू नेशनल हाईवे पर छह मील के पास, पठानकोट-मंडी 32 मील के पास दिनभर और पांवटा-शिलाई एनएच तीसरे दिन भी पूर्ण रूप से बाधित रहा। प्रदेश में 302 सड़कें भी बाधित चल रही हैं। 1,184 बिजली के ट्रांसफार्मर और 26 पेयजल योजनाएं भी ठप हैं। कालका-शिमला एनएच छह घंटे बंद रहा।
आठ जिलों में बाढ़ का खतरा
प्रदेश में रविवार को भी भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी हुआ है। आठ जिलों मंडी, शिमला, कांगड़ा, चंबा, हमीरपुर, बिलासपुर, कुल्लू और सोलन कि लिए बाढ़ की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार 16 अगस्त तक मौसम खराब बना रहने का पूर्वानुमान है। दो दिन में बिलासपुर और मंडी जिले में सबसे ज्यादा बादल बरसे हैं।
शाम पांच बजे पहुंची दूध, ब्रेड, आज नहीं आएगी सप्लाई
शाम 5:00 बजे के बाद ही लोगों को दूध, ब्रेड और अन्य सामान मिल सका। चंडीगढ़ से दूध, ब्रेड और पनीर की सप्लाई रविवार को शिमला नहीं आएगी। शहर में वेरका दूध के सप्लायर गिरीश शर्मा ने बताया कि शनिवार को वाहन देरी से शिमला से रवाना हुए। अब सोमवार को ही लोगों को सप्लाई मिलेगी।
कहां कितनी बारिश
क्षेत्र बारिश मिलीमीटर में
मंडी 105
पालमपुर 102
धर्मशाला 87
कांगड़ा 81
शिमला 37
सोलन 35
भूखे-प्यासे गाड़ियों में फंसे रहे लोग
शुक्रवार को चक्कीमोड़ के पास हाईवे बंद होने के बाद लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। इससे सैकड़ों वाहनों हाईवे पर फंसे रहे। उन्हें सड़क खुलने का सुबह तक इंतजार करना पड़ा। बारिश के बीच डर के साये में वाहन चालक खड़े रहे। सामने पहाड़ियां दरकता देख परेशान होते रहे। हाईवे बंद होने के बाद भूखे-प्यासे रहकर रात काटी।
कालका-शिमला नेशनल हाईवे-5 पर परवाणू से कुमारहट्टी में पहाड़ियां आफत बनकर ढह रही हैं। हालात यह है कि कब कहां से कोई पत्थर मुसीबत बनकर आ जाए इसके बारे में पता ही नहीं चलता। इसके चलते हाईवे पर कार, बस, ट्रक चालकों को गंतव्य तक पहुंचने के लिए जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। इसके साथ पेशेवर समेत कामकाज के लिए जा रहे लोगों को भी हाईवे बंद होने के बाद पैदल चलने पर मजबूर होना पड़ रहा है। कालका-शिमला हाईवे पर चलना जोखिमपूर्ण बना हुआ है।
- बेतरतीब तरीके से काटे पहाड़ आफत बनते जा रहे हैं। ऐसे में बस को कालका-सोलन रूट पर चलाना परेशानी का सबब है।
-धर्मेंद्र, बस चालक - परवाणू से धर्मपुर के बीच सफर करना कठिन है। इससे तो पुरानी सड़क ही सही थी। बारिश होने पर कभी भी सड़क बंद नहीं होती थी। -गोविंद, टैक्सी चालक
- एनएच की हालत काफी खराब है। जान को हथेली में रखकर काम करना पड़ रहा है। सड़क खराब होने के कारण परेशानी बढ़ गई है।-अशोक, बस परिचालक
- हाईवे पर चलने से डर लगता है। सफर सुरक्षित महसूस नहीं होता। शनिवार को भी अचानक पहाड़ गिर गया। इससे काफी दिक्कतें आई। -दीप चंद, चालक