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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal: vigilance FIR against three then electricity board engineers for giving undue benefits to a private

हिमाचल: निजी फर्म को अनुचित लाभ देने के आरोप में बिजली बोर्ड के तीन तत्कालीन इंजीनियरों पर एफआईआर

Thu, 25 Sep 2025 03:59 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 25 Sep 2025 03:59 PM IST
सार

 राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने राज्य बिजली बोर्ड के तीन तत्कालीन अभियंताओं व मेसर्स गिलवर्ट इस्पात के दो निदेशकों पर एफआईआर दर्ज की है।

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Himachal: vigilance FIR against three then electricity board engineers for giving undue benefits to a private
एफआईआर(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) ने निजी कंपनी को अनुचित तरीके से लाभ पहुंचाने के आरोप में बिजली बोर्ड के तीन पूर्व इंजीनियरों पर शिमला में केस दर्ज किया है। एफआईआर में निजी कंपनी गिलवर्ट इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के दो निदेशकों को भी नामजद किया गया है। इंजीनियरों पर कंपनी को गलत तरीके से 11.84 करोड़ का लाभ पहुंचाने का आरोप है। बिजली बोर्ड के चेयरमैन संजय गुप्ता की शिकायत पर विजिलेंस ने इनके खिलाफ केस दर्ज किया है।

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इस प्रकरण में तत्कालीन चीफ इंजीनियर ऑपरेशन राजेश कुमार ठाकुर, अधीक्षण अभियंता अनूप धीमान और चीफ इंजीनियर कामर्शियल वाईआर शर्मा के अलावा कंपनी निदेशक अभिनव मोदगिल और उमेश मोदगिल नामजद हैं। विजिलेंस अब सभी पहलुओं की जांच कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किस स्तर पर नियमों से समझौता हुआ और किसकी जिम्मेदारी बनती है। जानकारी के मुताबिक, बिजली बोर्ड चेयरमैन संजय गुप्ता ने मार्च में एसीएस गृह को इस मामले में शिकायत पत्र सौंपा था और विजिलेंस जांच की मांग उठाई थी। प्रारंभिक छानबीन में गड़बड़ी सामने आने पर अब विजिलेंस ने मामले में एफआईआर दर्ज की है। मामला सोलन जिले के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी की मैसर्स गिलवर्ट इस्पात प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से जुड़ा है। आरोप है कि कंपनी ने बिजली उपयोग के बाद 11.84 करोड़ रुपये तक का बिल समय पर नहीं चुकाया। पहले किस्तों में भुगतान की व्यवस्था हुई, लेकिन चेक बाउंस होने और किस्तों के अटकने से बकाया राशि लगातार बढ़ती गई और कंपनी डिफाल्टर हो गई।

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तत्कालीन सीएमडी पर कार्रवाई को विजिलेंस लेगी फैसला
निजी कंपनी को गलत तरीके से लाभ पहुंचाने के मामले में बिजली बोर्ड के तत्कालीन सीएमडी (चेयरमैन कम मैनेजिंग डायरेक्टर) पर भी कार्रवाई के आसार बन गए हैं। तत्कालीन सीएमडी पर कार्रवाई को लेकर विजिलेंस फैसला ले सकती है। अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करना बिजली बोर्ड के चेयरमैन के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
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दो अधीक्षण अभियंता डिमोट, वित्तीय शक्तियों से ज्यादा काम करवाने पर कार्रवाई
बिजली बोर्ड के अधीक्षण अभियंता जेनरेशन सर्किल साड़ाभाई-भुंतर रंजीत भाटिया और अधीक्षण अभियंता जनरेशन सर्किल भावानगर वरुण शर्मा को डिमोट कर वरिष्ठ अधिशासी अभियंता बना दिया गया है। बिजली बोर्ड चेयरमैन संजय गुप्ता के मुताबिक दोनों पर अपनी वित्तीय शक्तियों से बाहर जाकर काम करवाने के लिए मंजूरी देने का आरोप है। साल 2024 में बोर्ड ने वित्तीय शक्तियों को लेकर नियम बनाए थे, लेकिन ये अधिकारी पुराने नियमों के तहत ही काम करते रहे। बोर्ड ने दोनों को पहले चार्जशीट कर दिया था और अब जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद डिमोट कर दिया है।
 
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