कांटों का ताज लिए नए विजिलेंस प्रमुख के लिए आसान नहीं है राह
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भाजपा चार्जशीट के लगभग सभी मामलों में सुस्ती के नाम पर भले ही एडीजी अतुल वर्मा की विजिलेंस से छुट्टी कर दी गई हो, लेकिन नए ब्यूरो प्रमुख अनुराग गर्ग के लिए भी आगे की राह आसान नहीं है। गर्ग के पास 12 साल सीबीआई में काम करने का अनुभव है लेकिन विजिलेंस के पास कई ऐसे मामले है जिनमें सरकार का रुख उनकी मुश्किलें बढ़ा सकता है।
चाहे वह ब्रैकेल मामला हो जिसमें अडानी तक जांच की आंच पहुंच सकती है या फिर एचपीबीएल केस जिसमें शासन में बैठे कई अधिकारी मुश्किल में पड़ सकते हैं। ऐसे पेचीदा मामलों के बीच भाजपा चार्जशीट पर एक्शन लेकर कांग्रेस के चार्जशीट पेश करने से पहले ही उसे बैकफुट पर लाने को लेकर ब्यूरो पर सरकार का दोहरा दबाव रहेगा। दरअसल, पूर्व एडीजी डॉ. अतुल वर्मा कई मामलों को लेकर सरकार के रुख से उलट काम कर रहे थे।
ब्रैकेल मामले में जहां कैबिनेट की मंजूरी के बाद पेंच इस बात पर फंस गया था कि केंद्रीय नेतृत्व के करीबी कहे जाने वाले अडानी के खिलाफ भी मामला दर्ज होगा या नहीं। वहीं, एचपीबीएल को लेकर भी वर्मा और सरकार के बीच मतभेद था क्योंकि सरकार जहां एक ओर कांग्रेस चार्जशीट के एलान के बाद भाजपा चार्जशीट के मामलों में एक्शन को लेकर दबाव बना रही थी।
वहीं, विजिलेंस ब्यूरो एचपीबीएल मामले में एफआईआर होने को लेकर ही स्पष्ट नहीं था। धूमल के करीबी माने जाने वाले पूर्व डीजीपी डीएस मन्हास और रिटायर्ड एसपी हरदेश बिष्ट के मामले वापस लेने को लेकर भी सरकार और वर्मा के बीच खींचतान चल रही थी।
सूत्रों का कहना है कि वर्मा ने बिंदल मामले में भी केस वापस लेने को लेकर आपत्ति जताई थी। जिसके बाद से ही उनकी ब्यूरो से छुट्टी होना तय माना जा रहा था। अब देखना यह है कि सरकार और ब्यूरो के बीच की खींचतान को खत्म कर नए ब्यूरो प्रमुख कैसे इन पेचीदा मामलों को हैंडल करते हैं।