सेवानिवृत्ति के दिन मौत पर भी आश्रित को मिलेगी करुणामूलक नौकरी
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शीत सत्र के अंतिम दिन करुणामूलक आधार पर नियुक्ति देने का मामला जोर-शोर से गूंजा। कांग्रेस विधायक अनिरुद्ध सिंह, सुखविंद्र सिंह सुक्खू, सुरेंद्र शौरी और रविंद्र कुमार ने प्रश्नकाल में मुख्यमंत्री से सवाल पूछा था। जवाब में सीएम ने कहा कि विभिन्न विभागों में तृतीय श्रेणी के 2303 और चतुर्थ श्रेणी के 1737 मामले लंबित हैं। अगर किसी कर्मचारी की सेवानिवृत्ति वाले दिन मृत्यु हो जाती है तो भी सरकार आश्रित को करुणामूलक आधार पर नौकरी देगी।
सीएम ने कहा कि सरकार ने हाल में करुणामूलक आधार पर नौकरियां देने के मामले में बड़ा बदलाव किया है। पहले कई शर्तें थीं, जिनमें वर्तमान सरकार ने व्यापक बदलाव किया है। वहीं, कांग्रेस विधायक सुखविंद्र सिंह सदन में बार-बार सभी आश्रितों को एक बार ही नौकरी देने का मामला उठाते दिखे, जिस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि एक साथ इस प्रकार नियुक्तियां देना संभव नहीं है। इससे अन्य भर्ती प्रक्रिया भी प्रभावित होगी और संबंधित विभाग में भी कर्मचारी के आश्रितों को नौकरी देना चर्चा बनेगा।
पहले सिर्फ वित्त विभाग के पास जाते थे मामले
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व में 50 साल से पहले सेवारत कर्मचारी के आश्रितों को नौकरी देने के लिए पात्र माना जाता था। इसके अलावा करुणामूलक आधार पर नौकरी देने के मामले वित्त विभाग देखता था। आय सीमा में छूट भी डेढ़ लाख रुपये तक थी, पांच प्रतिशत हर विभाग में नौकरी देने का प्रावधान नहीं था। आवेदन करने के लिए तीन वर्ष की समय छूट थी। नौकरी देने के बाद छह महीने में दो बार परीक्षा देने का प्रावधान भी था।
अब हर विभाग अपने स्तर पर देखेगा मामले
सीएम ने कहा कि करुणामूलक आधार पर नौकरी देने के प्रावधानों में सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। अब 50 साल की शर्त को पूरी तरह खत्म कर दिया है। वित्त के अलावा अब सभी विभाग अपने-अपने स्तर पर करुणामूलक के मामलों का निपटारा करेंगे। डेट ऑफ डेथ के अनुसार सीनियर पात्र होंगे।
आय में ढाई लाख रुपये तक की छूट, नियमित भर्ती में पांच प्रतिशत नियुक्तियां करुणामूलक आधार पर होंगी। विशेष मामलों का मंत्रिमंडल में तुरंत प्रभाव से निपटारा होगा। आवेदन करने की अवधि मृत्यु के चार साल बाद तक होगी। अगर कोई आश्रित व्यस्क नहीं है, तो व्यस्क होने के बाद चार साल माने जाएंगे।