वीरभद्र ने सदन में कहा, तमीज से बात करो
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हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन पर संकट के बादल देख विपक्ष गुस्से में था। सदन में खेल विधेयक पर चर्चा हो रही थी। विपक्ष की मांग थी कि यह गंभीर मामला है इस पर लंबी चर्चा होनी चाहिए।
या फिर इस विधेयक को पारित करने से पहले प्रवर समिति को भेजा जाना चाहिए। लेकिन सत्ता पक्ष इस बात पर अड़ा था कि आज प्राइवेट मेंबर्स डे है। इस पर चर्चा के लिए तीन प्रस्ताव लगे हैं और इस चर्चा को पांच बजे से अधिक नहीं खींचा जा सकता।
इसलिए सत्ता पक्ष भोजनावकाश से पहले ही इस बिल पर चर्चा पूरी कर इसे पारित करने का दबाव बनाता रहा। इसी को लेकर नोक-झोंक शुरू हो गई। इसमें एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए गए। नेता प्रतिपक्ष और मुख्यमंत्री के बीच तीखे संवाद हुए।
वीरभद्र: लेने वाला पुत्र था और देने वाला पिता था।
धूमल: अध्यक्ष महोदय! जो बात मुख्यमंत्री जी ने कही, आपका स्पोर्ट्स में कंट्रीब्यूशन इतना ही है कि आप अपने पिताश्री के नाम से क्रिकेट टूर्नामेंट करवाते हो और माताश्री के नाम से वालीबाल का टूर्नामेंट करवाते हो। तुम्हारा कंट्रीब्यूशन यही है।
वीरभद्र: जब ये कहते हैं कि किसी ने स्टेडियम बनाया है तो ये भी सच्चाई है कि एक-एक स्टेडियम के लिए, आप मुख्यमंत्री थे और आप उस एसोसिएशन के चीफ पैट्रन थे। उस हैसियत से आपने सरकारी भूमि मुफ्त में दे दी या छोटी सी टोकन रकम में दे दी। मैं समझता हूं, मुफ्त में दी। ...समझ लो मुफ्त में ही दे दी।
धूमल: आप जो रोहडू़ में पदम सिंह के नाम पर या माता के नाम पर टूर्नामेंट करवाते हो तो क्या वह आपके पिताश्री का है? सरकारी जमीन होती है जो खेलों के लिए ली जाती है, वही होती है लेकिन टूर्नामेंट आपने अपने नाम से शुरू करवा दिए। वो
जमीन कहां से दी?
वीरभद्र: नहीं वह गवर्नमेंट का स्टेडियम है। (अंग्रेजी में) लेकिन आपने सरकारी जमीन एक खास एसोसिएशन को दे दी।
धूमल: आपने उसको ले लिया। जब हाई कोर्ट ने फटकार लगाई तब क्या हुआ? जो आपकी आज टिप्पणी आई।
वीरभद्र: आप तमीज से बात करो।
वीरभद्र: क्या आपने हिमाचल क्रिकेट एसोसिएशन पर कब्जा किया है? अगर कब्जा किया है तो इट कम्स बाय सर्टेन प्रोसेस।
रणधीर शर्मा: मैं बताता हूं आपने किस दिन कब्जा किया...आधी रात को कब्जा करने के प्रयास किए।
वीरभद्र: अगर कोई गलत काम हुआ तो वह जंग जारी रहेगी।
रणधीर शर्मा: गलत क्या है? जो है वह है। आप 2005 में बिल लाए, आपने 2007 की कैबिनेट में उसे वापस लेने का निर्णय लिया...।
स्पीकर: प्लीज डोंट डिस्टर्ब द स्पीकर....अगर आप बोलना चाहते हैं बाद में बोल लें..।
रणधीर शर्मा: (सीएम की ओर इशारा कर) आपका यही हाल रहा तो अगली बार जनता आपको वैसे ही बाहर कर देगी।
वीरभद्र: आप ही सबसे पहले जाएंगे। ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए।
रणधीर शर्मा: और क्या बोलें।
वीरभद्र: आप तमीज से बात करो।
रणधीर शर्मा: इससे ज्यादा और तमीज कहां से लाएं....आप अपने विधायकों को तमीज सिखाओ। क्या ये तमीज से बोल रहे हैं।
स्पीकर: प्लीज डोंट वेस्ट टाइम। कोई स्पीच दे रहा है तो उसकेे बीच में मत बोलिए। अगर आपने बोलना है, तो बाद में बोल लीजिए। इससे टाइम वेस्ट होता है और फायदा कोई नहीं। प्लीज डोंट वेस्ट टाइम।
रणधीर शर्मा: अध्यक्ष महोदय! मैं यह कहना चाहता हूं कि इस विधेयक को लाने के पीछे इनका हिडन एजेंडा है..... (नारेबाजी..... व्यवधान)
अध्यक्ष: आप भी बस करो।