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हिमाचल ने तैयार की अपनी जैव प्रौद्योगिकी नीति

Sat, 19 Apr 2014 08:13 PM IST
Updated Sat, 19 Apr 2014 08:13 PM IST
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Himachal to set up bio-technology policy

प्रदेश ने अपनी जैव प्रौद्योगिकी (बायो टेक्नोलॉजी) नीति तैयार कर ली है। इसकी मदद से युवाओं को रोजगार मुहैया कराने से लेकर औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया गया है।

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विशेषज्ञों से विचार-विमर्श के बाद यह नीति बनाई गई है। इसे मंजूरी के लिए पर्यावरण, विज्ञान एवं तकनीकी निदेशालय ने प्रस्ताव सचिवालय में भेजा है।

हालांकि, लोकसभा चुनाव के बाद ही सरकार इस पर कोई निर्णय ले पाएगी।

खेती, पशुपालन क्षेत्र में विकास का भी प्रावधान

Himachal to set up bio-technology policy

नीति के तहत प्रदेश में खेती, पशुपालन, औषधि (दवा), पर्यावरण, जैव विविधता संरक्षण और जैव औद्योगिक विकास के क्षेत्र में कार्य करने का प्रावधान किया है।

जैव प्रौद्योगिक उत्पाद और सेवा को विकसित करने पर जोर दिया गया है। युवाओं को जैव प्रौद्योगिक के क्षेत्र में प्रशिक्षित किया जाए, जिससे उन्हें आसानी से रोजगार मिल सके। जैव प्रौद्योगिकी को औद्योगिक ढांचे में विकसित करने का सुझाव दिया गया है।

ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जाए, जहां जैव उत्पाद आसानी से उपलब्ध हो जाए। जैव क्षेत्र में निवेश कराने, आर्थिक विकास से जोड़ने, जैव अनुसंधान को जोड़ने, जैव उत्पाद को प्रोत्साहित करने, स्थानीय लोगों और एनजीओ को जोड़ने की बात नीति में शामिल की गई है।

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जैव प्रौद्योगिकी पार्क बनाने की भी सिफारिश

Himachal to set up bio-technology policy

जैव प्रौद्योगिक पार्क बनाने की भी सिफारिश की गई है। इसके तहत जैव प्रौद्योगिकी सेंटर खोलने, औद्योगिक प्लॉट कंपनियों को देने, दवाइयों का कच्चे माल बेचने को सेंटर बनाने के साथ जेनेटिक पौध उपलब्ध करवाने के साथ ऑनलाइन ट्रेडिंग विकसित की जाए।
फूल और अन्य प्रजातियों के लिए कोल्ड स्टोरेज की सुविधा उपलब्ध हो।

जैव प्रौद्योगिकी नीति में सिंगल विंडो सिस्टम बनाने का सुझाव दिया गया है, जिससे जैव प्रौद्योगिक से संबंधित जितने भी प्रोजेक्ट आएं, उन्हें सिंगल विंडो सिस्टम के जरिये ग्रीन सिग्नल मिल जाए।

ऐसी औद्योगिक इकाइयों को स्थापित करने से पहले पंजीकरण कराने की व्यवस्था हो। पर्यावरण, विज्ञान एवं तकनीकी विभाग में इसको लेकर आवेदन किया जाए।

विज्ञान एवं तकनीकी विभाग के निदेशक डा. एसएस नेगी का कहना है कि हिमाचल की जैव विविधता को ध्यान में रखकर पिछले एक साल से जैव प्रौद्योगिकी नीति पर काम चल रहा था। अप्रैल के पहले सप्ताह में ही नीति तैयार करके सचिवालय में जमा कर दी गई है।

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