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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal: Those involved in chitta drug trafficking will be barred from contesting elections; Act Approved

Himachal: चिट्टे में संलिप्त नहीं लड़ पाएंगे चुनाव; जीत के बाद दोषी पाए जाने पर भी जाएगी कुर्सी, अधिनियम मंजूर

Wed, 06 May 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 06 May 2026 05:00 AM IST
सार

राज्यपाल ने हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज संशोधन अधिनियम 2026 को मंजूरी दे दी। बजट सत्र में इस संशोधन विधेयक को विधानसभा में लाया गया था। 

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Himachal: Those involved in chitta drug trafficking will be barred from contesting elections; Act Approved
हिमाचल पंचायत चुनाव 2026। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में चिट्टे के मामलों में संलिप्त लोग चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। जीतने के बाद अगर जनप्रतिनिधि दोषी पाया जाता है तो ऐसी स्थिति में उसे कुर्सी से हाथ धोना पड़ेगा। राज्यपाल ने  हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज संशोधन अधिनियम 2026 को मंजूरी दे दी। बजट सत्र में इस संशोधन विधेयक को विधानसभा में लाया गया था। सत्ता पक्ष व विपक्ष के विधायकों की विस्तृत चर्चा के बाद पारित इस विधेयक को मंजूरी के लिए राजभवन भेजा गया। सरकार के इस फैसले को नशे पर शिकंजे के साथ पंचायत स्तर पर स्वच्छ छवि के प्रतिनिधियों को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है। हिमाचल में लंबे समय से चिट्टे के बढ़ते मामलों को लेकर यह कड़ा प्रावधान किया गया है। इससे पंचायत चुनाव में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों की भागीदारी पर रोक लगेगी और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही बढ़ेगी। साथ ही ग्राम सभाओं की कार्यप्रणाली को सुचारु बनाने के लिए भी अहम बदलाव किया गया है। हिमाचल प्रदेश में चिट्टा पांव पसारता जा रहा है। प्रतिदिन हिमाचल के किसी न किसी कोने में आरोपियों को चिट्टे के साथ पकड़ा जा रहा है।

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ग्राम सभाओं में कोरम पूरा करने को अब वोटरों का 1/10 भाग अनिवार्य
राज्यपाल ने ग्रामसभा के कोरम में भी बदलाव करने को मंजूरी दी है। अब ग्राम सभा की बैठक में कोरम पूरा करने के लिए पंचायत के कुल मतदाताओं के कम से कम दसवें (1/10) हिस्से की उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। पहले एक चौथाई सदस्यों का होना अनिवार्य था। यह फैसला इसलिए लेना पड़ा, क्योंकि ग्राम सभाओं में कोरम पूरा नहीं हो पा रहा था। पंचायतों में विकास कार्यों करवाने में दिक्कतें पेश आ रही थीं। नए प्रावधान के लागू होने से अब ग्राम सभाओं में अधिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा। इससे विकास योजनाओं को समय पर मंजूरी मिलने में मदद मिलेगी और पंचायत स्तर पर लंबित मामलों का निपटारा तेजी से हो सकेगा। गौरतलब है कि इस संशोधन को पहले विधानसभा में मंजूरी दी गई थी, जिसके बाद इसे राज्यपाल के पास अंतिम स्वीकृति के लिए भेजा गया था। अब राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून प्रभावी हो गया है।

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