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Himachal: किसानों के अनुदान पर राजकोष का ताला, दस करोड़ रुपये अटके, जानें पूरा मामला

Sat, 18 Apr 2026 11:47 AM IST
Krishan Singh रविंद्र शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना।
रविंद्र शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 18 Apr 2026 11:47 AM IST
सार

बागवानी विभाग ने विभिन्न योजनाओं के तहत किसानों की ओर से खरीदे उपकरणों के बिल करीब छह महीने पहले ही राजकोष विभाग को भेजे थे, लेकिन विभाग के सुस्त रवैये के कारण वित्त वर्ष समाप्त होने से पहले किसानों की अनुदान राशि का भुगतान नहीं किया गया। 

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Himachal: The treasury locks farmers' subsidies, ten crore rupees stuck, know the whole matter
किसानों के अनुदान पर राजकोष का ताला। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

किसानों की आय दोगुनी करना तो दूर, उन्हें अनुदान राशि लेने के लिए ही जूते घिसने पड़ रहे हैं। दरअसल राजकोष विभाग किसानों की करोड़ों रुपये की अनुदान राशि पर कुंडली मारे बैठा है। बागवानी विभाग ने विभिन्न योजनाओं के तहत किसानों की ओर से खरीदे उपकरणों के बिल करीब छह महीने पहले ही राजकोष विभाग को भेजे थे, लेकिन विभाग के सुस्त रवैये के कारण वित्त वर्ष समाप्त होने से पहले किसानों की अनुदान राशि का भुगतान नहीं किया गया। अब ऐसे में प्रदेश के सैकड़ों बागवानों व किसानों के करीब दस करोड़ की अनुदान राशि लैप्स हो गई। अकेले जिला ऊना के 67 किसानों की 23 लाख रुपये के अनुदान राशि राजकोष की सुस्त रवैये के कारण अटक गई है। ऐसे में सवाल खड़े हो रहे हैं कि जब बजट का प्रावधान भी था तो किसानों को अनुदान राशि क्यों जारी नहीं की गई। राज्य सरकार की बागवानों के लिए चलाई जा रही योजनाएं राजकोष आधारित हैं। इन योजनाओं की अनुदान राशि राजकोष विभाग सीधे आवेदन करने वाले किसानों के बैंक खाते में डालता है। वित्त वर्ष 2025-26 में आवेदन करने वाले कई किसानों की अनुदान राशि को रोक कर रखा।

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अब वित्त वर्ष 2025-26 समाप्त होने के बाद यह राशि लैप्स हो गई। किसानों ने बागवानी योजनाओं के तहत आवेदन कर कृषि से संबंधित उपकरण खरीद कर विभाग को छह महीने पहले बिल दे दिए थे। विभाग ने निरीक्षण और औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पात्र किसानों के बिल राजकोष को भेज दिए थे लेकिन वित्त वर्ष के अंत तक भुगतान नहीं किया गया। बागवानी क्षेत्र से जुड़े किसानों का कहना है कि विभाग की योजनाएं तभी सफल होंगी, जब अनुदान तय समय पर मिले। यदि किसानों को महीनों इंतजार करना पड़ेगा तो भविष्य में लोग योजनाओं में रुचि कम दिखाएंगे। खासकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह देरी बड़ी परेशानी बन रही है। हिमाचल किसान यूनियन (सीटू) के जिला सचिव गुरनाम ने कहा कि किसानों पर मार पड़ रही है। कई किसानों ने बैंक ऋण लेकर पौधरोपण, सिंचाई व्यवस्था और संरचनाएं तैयार की।  


 

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किसानों की अनुदान राशि के बिलों को समय पर राजकोष विभाग के पास भेज दिया था। अब नए वित्त वर्ष में रुकी हुई अनुदान राशि को मुहैया करवाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। डॉ. सतीश शर्मा, निदेशक, बागवानी विभाग

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