नियमित की जाएं प्रधानाचार्यों की पदोन्नतियां, हिमाचल शिक्षक मंच ने उठाई मांग
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हिमाचल शिक्षक मंच ने प्रदेश में प्रधानाचार्य पदों पर की गई अस्थाई नियुक्तियों को नियमित कर सभी वित्तीय लाभ शीघ्र देने की मांग उठाई है। मंच के प्रदेश संयोजक अश्वनी भट्ट, संजय मोगू, अनिश बन्याल, तपिष थापा, संजीव राणा, विजय
शमशेर भंडारी और अमित शर्मा ने बताया कि प्रदेश में साल 2018 से प्रधानाचार्यों के पदों पर नियमित नियुक्तियों के स्थान पर तदर्थ और प्लेसमेंट आधार पर नियुक्तियां की जा रही हैं।
पूर्व सैनिकों के सेना के सेवाकाल को सामान्य सेवा में न जोड़ने का मामला कोर्ट में लंबित होने की वजह से प्रदेश में नियमित पदोन्नतियों पर रोक लगी थी। कोर्ट ने अपना फैसला दे दिया है।
इसलिए साल 2008 से 2018 तक विभाग ने पूर्व की तरह प्रधानाचार्यों की अस्थाई पदोनतियां कीं और पूर्व सैनिकों को भी अस्थाई तौर पर पदोन्नत किया जाता रहा।
मामले पर कोर्ट से आया ये फैसला
साल 2017 में कोर्ट का फैसला पूर्व सैनिकों के खिलाफ आ चुका है। सरकार ने भी सैनिकों को वरिष्ठता लाभ न देने की अधिसूचना जारी की है। मंच ने मांग की है कि शीघ्र पूर्व सैनिकों की साल 2008 की स्थिति के अनुुसार नए सिरे से वरिष्ठता सूची बनाई जाए।
जिन पूर्व सैनिकों को गलत एवं असंवैधानिक तरीके से अस्थाई तौर पर पदोन्नत किया गया है, उन्हें उनके मूल पदों पर वापस नियुक्त किया जाए। योग्य प्रधानाचार्यों की अस्थाई नियुक्तियों को नियमित पदोन्नति में बदला जाए।
उन्हें सभी देय वित्तीय लाभ उनकी नियुक्ति की तिथि से दिए जाएं। प्रदेश में करीब 1200 प्रधानाचार्यों को प्रधानाचार्य पद का वेतन और भत्ते नहीं पा रहे हैं। कई ऐसे प्रधानाचार्य हैं, जो दस साल से आर्थिक लाभ को तरस रहे हैं।
मंच ने शिक्षा निदेशक से मांग की कि पूर्व सैनिकों की पदोन्नतियों को भी तुरंत रद्द कर उन्हें उनके मूल पद पर नियुक्त कर नई वरिष्ठता सूचियां जारी की जाएं।