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हिमाचल: बिना जांच ही पशुधन के साथ भरमौर पहुंचने लगे भेड़पालक
Tue, 21 Apr 2020 05:00 AM IST
Krishan Singh
हरीश चंद्र, अमर उजाला, धर्मशाला
हरीश चंद्र, अमर उजाला, धर्मशाला
Published by: Krishan Singh
Updated Tue, 21 Apr 2020 05:00 AM IST
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पशुधन को ले जाते भेड़पालक
- फोटो : अमर उजाला
कोरोना प्रभावित जिलों से पैदल पशुधन के साथ चंबा जिले के भरमौर पहुंच रहे भेड़पालकों से वहां कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा मंडरा रहा है। भेड़पालक धौलाधार की पर्वत शृंखलाओं को पार कर भरमौर उपमंडल के गांवों में पहुंचाना शुरू हो गए हैं। ऐसे में वहां मौजूद लोगों को कोरोना वारयस होने की आशंका सता रही हैं। क्योंकि जो भी भेड़पालक भरमौर के गांवों में अब पहुंचना शुरू हुए हैं, वे कोरोना प्रभावित पंजाब सहित ऊना, नालागढ़, बद्दी क्षेत्रों से पैदल कांगड़ा जिले से होकर आ रहे हैं। भेड़पालकों को प्रशासन ने पैदल चलने की छूट दी है। कोरोना प्रभावित क्षेत्रों से आ रहे भेड़पालकों की जांच या स्क्रीनिंग नहीं हो रही हैं।
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ऐसे में भरमौर में रह रहे लोगों को कोरोना वारयस भेड़पालकों के साथ आने की चिंता हो रही है। इस सप्ताह चार-पांच भेड़पालक पशुधन के साथ भरमौर उपमंडल के अलग-अलग गांवों में पहुंचे हैं। उधर, पशुपालन विभाग कांगड़ा के उपनिदेशक एसके धीमान ने कहा कि नगरोटा सूरियां के सकड़ी और शाहपुर के दरीणी में दो शिविर लगाए हैं। जहां भेड़-बकरियों पर छिड़काव व उपचार किया जा रहा है, लेकिन भेड़पालकों की कोई जांच उनका विभाग नहीं कर रहा हैं। जिस भेड़पालक को राशन की जरूरत है, उसे पशुपालन विभाग पूरा कर रहा है। इसके अलावा चंबा जिला के लाहड़ू, थलेल व जोत में भी विभाग के शिविर हैं।
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इंद्रहार, तोरल व कुडंली जोत पार कर रहे भेड़पालक
पंजाब सहित ऊना, नालागढ़, बद्दी क्षेत्रों से पैदल कांगड़ा जिले के नरवाणा, खनियारा, भागसूनाग, त्रियुंड में रात्रि ठहराव करते हैं। अगले दिन त्रियुंड में ठहरे भेड़पालक धौलाधार पर्वत शृंखला के इंद्रहार जोत, नरवाणा के तोरल जोल और खनियारा में ठहरे भेड़पालक कुडंली जोत पार कर भरमौर पहुंचते हैं। सीएमओ कांगड़ा डॉ. गुरदर्शन गुप्ता ने कहा कि उन्हें भेड़पालकों की जांच करने के बारे में कोई हिदायत नहीं मिली हैं। भेड़पालकों से आग्रह है कि पैदल चलते समय शहरी क्षेत्रों में सोशल डिस्टेंसिंग का विशेष ध्यान रखें। रास्ते में किसी व्यक्ति से दूर से ही बात करें।
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