भेड़ पालकों को नहीं मिल रहे खरीदार, कौड़ियों के भाव बिक रही ऊन
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ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और इटली आदि देशों की ऊन प्रदेश की भेड़ पालकों पर भारी पड़ रही है। विदेशों से भारत के बाजार में आ रही ऊन सैकड़ों रुपये प्रति किलो बिक रही है। इसके विपरीत प्रदेश में भेड़ पालकों से 25 से 65 रुपये प्रति किलो तक ही भेड़ों की ऊन बिक रही है। यहां के भेड़ पालकों की भेड़ों की ऊन कौड़ियों के भाव बिक रही है।
हिमाचल की ऊन को अच्छे खरीदार ही नहीं मिल रहे हैं। प्रदेश सरकार की वूल फेडरेशन भेड़ पालकों से बरसात की सफेद ऊन 65 रुपये किलो, काली ऊन मात्र 45 रुपये, सर्दी की सफेद ऊन 31 रुपये और काली ऊन 25.50 प्रति किलो खरीद रही है। अगर किसी की ऊन रंग बिरंगी है तो उसे वूल फेडरेशन भी खरीदने से मना कर रही है।
प्रदेश में भेड़ों की नस्ल न सुधरने के कारण भेड़, बकरियों के पालकों को नुकसान हो रहा है। ज्यूरी क्षेत्र के भेड़ पालक नरेंद्र सोनी, संजय, बुद्धि सिंह, शेर सिंह, प्रेम सिंह, धर्म सिंह, मोती लाल, महेंद्र सिंह, मान सिंह खाची, दौलत राम, याशमीन, प्रेम सुख और मुन्नी लाल का कहना है कि उनकी भेड़ों की ऊन के रेट बहुत कम दिए जा रहे है।
पुराने स्टॉक को नहीं मिले खरीदार
इससे यह धंधा घाटे का सौदा साबित हो रहा है। उनके पास पुरानी नस्ल की भेड़ें रंग बिरंगी है, जिससे एक ही भेड़ से कई रंग की ऊन निकलती है। इसे प्रदेश सरकार की वूल फेडरेशन लेने से ही इनकार कर देती है।
उन्होंने मांग की है कि सरकार भेड़ पालकों को अच्छी नस्ल की भेड़ें उपलब्ध करवाए, ताकि उनकी ऊन भी विदेशी ऊन के मुकाबले अच्छी बिक सके।
प्रदेश वूल फेडरेशन के प्रबंधक दीपक सैनी ने बताया कि इस बार ऊन की कीमतें बढ़ाने के लिए फाइल तैयार थी।
लेकिन पिछले ऊन के स्टॉक को ही खरीदार न मिलने इसे रोकना पड़ा। बीकानेर और अन्य मंडियों में विदेशी ऊन आने से हिमाचल, उत्तराखंड और जेएंडके की ऊन की खरीद के लिए अच्छे दाम नहीं मिल पा रहे हैं।