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हिमाचल में धारा 118 को ठेंगा: गैर-कृषक ने बसा दी अवैध कॉलोनी, हाईकोर्ट ने सरकार को थमाया नोटिस
Thu, 05 Nov 2026 09:53 AM IST
Ankesh Dogra
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Thu, 05 Nov 2026 09:53 AM IST
सार
हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के रक्कड़ में धारा 118 के कथित उल्लंघन का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। गैर-कृषक द्वारा अवैध कॉलोनी बसाने के आरोपों पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 22 दिसंबर को होगी।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
ऊना के रक्कड़ में धारा 118 का खुला उल्लंघन कर गैर-कृषक द्वारा अवैध कॉलोनी बसाने के मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने राज्य सरकार और प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की खंडपीठ में मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने जवाब के लिए समय देते हुए अगली सुनवाई 22 दिसंबर तय की है। याचिकाकर्ता भावक पराशर ने अदालत में हलफनामा दाखिल कर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रतिवादी इंदु वालिया के पति राम प्रकाश को धारा 118 में गैर-कृषक घोषित किया जा चुका है।
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इस फैसले के खिलाफ दायर की गई अपील भी पहले ही पूरी तरह खारिज हो चुकी है। गैर-कृषक और जमीन मालिकों के बीच जॉइंट डेवलपमेंट समझौते के लिए सरकारी अनुमति जरूरी है। आरोप है कि संबंधित अनुमति की जांच करने में राज्य सरकार पूरी तरह विफल रही है। एनजीटी और उपायुक्त ऊना की रिपोर्ट में भी कई बड़े खुलासे पहले हुए थे।कुल 11.96 हेक्टेयर में से केवल 5.16 हेक्टेयर भूमि ही इंदु वालिया के नाम दर्ज थी। संबंधित जमीन पर जापानी तूत, सिंबल और तुनी के पेड़ों का अवैध कटान किया गया था।
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इसके लिए 1,01,000 रुपये जुर्माना और 3,83,870 रुपये पर्यावरणीय मुआवजा भी लगाया गया था। अदालत को बताया गया कि कॉलोनी बनाने के लिए पहाड़ियों को समतल किया जा रहा था। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और प्रतिवादियों ने याचिकाकर्ता के नए तथ्यों पर जवाब के लिए समय मांगा है। हाईकोर्ट ने यह मांग स्वीकार करते हुए अगली तिथि निर्धारित की है।
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कारदार की कुर्सी पर वंशानुगत दावे को झटका, उपायुक्त के आदेश रद्द
हाईकोर्ट ने कुल्लू के देवता त्रियुगी नारायण मंदिर के कारदार विवाद में डीसी का समीक्षा आदेश रद्द कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वित्तीय गड़बड़ी पर हटाए गए व्यक्ति के बेटे को सीधे वंशानुगत हक नहीं मिल सकता। न्यायाधीश संदीप शर्मा की पीठ ने करम चंद की याचिका पर यह फैसला सुनाया। पुराने कारदार पुरुषोत्तम को 2017 में गड़बड़ी पर हटाया गया था। उनके निधन के बाद बेटे कृष्ण बलदेव ने पद पर दावा किया था। डीसी कुल्लू ने बिना सभी पक्षों को सुने उसे सीधे कारदार नियुक्त कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा कि पारंपरिक नियमों के अनुसार ऐसी स्थिति में हारियानों की आम सहमति जरूरी है। अदालत ने डीसी को चार सप्ताह में बैठक बुलाकर प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने कुल्लू के देवता त्रियुगी नारायण मंदिर के कारदार विवाद में डीसी का समीक्षा आदेश रद्द कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वित्तीय गड़बड़ी पर हटाए गए व्यक्ति के बेटे को सीधे वंशानुगत हक नहीं मिल सकता। न्यायाधीश संदीप शर्मा की पीठ ने करम चंद की याचिका पर यह फैसला सुनाया। पुराने कारदार पुरुषोत्तम को 2017 में गड़बड़ी पर हटाया गया था। उनके निधन के बाद बेटे कृष्ण बलदेव ने पद पर दावा किया था। डीसी कुल्लू ने बिना सभी पक्षों को सुने उसे सीधे कारदार नियुक्त कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा कि पारंपरिक नियमों के अनुसार ऐसी स्थिति में हारियानों की आम सहमति जरूरी है। अदालत ने डीसी को चार सप्ताह में बैठक बुलाकर प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
तलवार से वार करने के आरोपी को अग्रिम जमानत नहीं, याचिका खारिज
ऊना के एक होटल में हुई हिंसक झड़प के मुख्य आरोपी सरुल कपिला को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। न्यायाधीश राकेश कैंथला की अदालत ने अपराध की गंभीरता और प्रथम दृष्टया साक्ष्यों को देखते हुए उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। 19-20 नवंबर 2025 की रात एक जन्मदिन पार्टी में आरोपी ने परमिंदर और पुरजिंद्र पर तलवार से करीब 20 वार किए थे। इस जानलेवा हमले में परमिंदर गंभीर रूप से घायल होकर अब 100 फीसदी दिव्यांग हो चुके हैं। अदालत ने सीसीटीवी फुटेज का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि ऐसे गंभीर अपराधों में सिर्फ चार्जशीट दाखिल होने या पूछताछ की जरूरत न होने के आधार पर अग्रिम जमानत नहीं दी सकती है। संवाद
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जमानत बॉन्ड रद्द करने से पहले नोटिस देना जरूरी नहीं
प्रदेश हाईकोर्ट ने जमानत बॉन्ड की जब्ती को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टीकरण दिया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया है कि आरोपी के निर्धारित तिथि पर अदालत में पेश न होने की स्थिति में जमानत बॉन्ड जब्त करने से पहले जमानती को कारण बताओ नोटिस जारी करना अनिवार्य नहीं है। अदालत के अनुसार आरोपी की गैरहाजिरी बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन है और ऐसी स्थिति में बांड स्वतः जब्त माना जाएगा। अदालत ने बीएनएसएस की धारा-491 का हवाला देते हुए कहा कि जमानत बॉन्ड की जब्ती की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होती है। पहले चरण में आरोपी के अदालत में पेश नहीं होने पर बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन होने के कारण उसे जब्त माना जाता है। इस स्तर पर जमानती को पूर्व में नोटिस देना जरूरी नहीं है। स्पष्ट किया कि जमानती को अपनी बात रखने और बचाव का अवसर दूसरे चरण में दिया जाता है। जब अदालत जमानती से जुर्माना वसूलने की प्रक्रिया शुरू करती है, तब उसे नोटिस जारी कर पूछा जाता है कि उस पर जुर्माना क्यों न लगाया जाए। इस दौरान जमानती अपना पक्ष रख सकता है। डिवीजन बेंच ने कहा कि बॉन्ड जब्त करने के पहले चरण में ही नोटिस जारी करना जरूरी कर दिया जाए तो न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी होगी। इससे आरोपी भी कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए इस व्यवस्था का लाभ उठा सकते हैं।
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