हिमाचल: प्रदेश के स्कूलों की स्काफ से होगी रैंकिंग, सही संस्थान चुनना होगा आसान
स्कूलों की अब ग्रेडिंग होगी। इसके लिए स्कूलों को स्काफ एप पर स्वयं मूल्यांकन दर्ज करना होगा। मूल्यांकन की सत्यता के लिए उन्हें फोटो और वीडियो भी अपलोड करने होंगे।
विस्तार
हिमाचल प्रदेश के स्कूलों की अब ग्रेडिंग होगी। इसके लिए स्कूलों को स्काफ एप पर स्वयं मूल्यांकन दर्ज करना होगा। मूल्यांकन की सत्यता के लिए उन्हें फोटो और वीडियो भी अपलोड करने होंगे। स्कूलों की ओर से दर्ज जानकारी से एप प्रतिशतता निकालेगा और उसी आधार पर ग्रेड दिए जाएंगे। इससे अभिभावकों को बच्चों के लिए बेहतर स्कूल चुनने में मदद मिलेगी। जानकारी के अनुसार सरकारी और निजी स्कूलों की यह ग्रेडिंग एसएसएसए के तहत होगी। इस दौरान स्काफ एप पर दोनों प्रकार के स्कूलों को अपनी-अपनी सेल्फ असेस्मेंट दर्ज करनी होगी। यह असेसमेंट पांच अलग-अलग बिंदुओं पर आधारित होगी। प्रत्येक बिंदु पर अलग-अलग प्रश्न होंगे, जिनके उत्तर संबंधित स्कूलों को स्वयं देने होंगे।
स्कूलों की ऐसे की जाएगी असेसमेंट
उत्तर की सत्यता के लिए स्कूलों को दो-दो फोटो और एक वीडियो अपलोड करना होगा। पांचों बिंदुओं को भरने के बाद उनके उत्तरों के आधार पर ऑनलाइन अंक दिए जाएंगे और उन्हीं अंकों से प्रतिशतता बनकर ग्रेडिंग तय होगी। ग्रेडिंग के बाद स्कूल स्वयं भी दूसरे स्कूलों से तुलना कर सकेंगे। इससे उन्हें अपनी कमियों और सुधार के उपायों की जानकारी मिलेगी। साथ ही ग्रेडिंग बढ़ाने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने में भी मदद मिलेगी।
सरकारी और निजी स्कूलों की ग्रेडिंग के लिए स्काफ एप पर ऑनलाइन 6 अपना मूल्यांकन करना होगा। पांच अलग-अलग डोमेन में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तरों के आधार पर जो ऑनलाइन प्रतिशतता बनेगी। इसके आधार पर ग्रेडिंग दी जाएगी। स्कूलों द्वारा भरी ऑनलाइन जानकारी की शिक्षा बोर्ड प्रबंधन रैंडम चैकिंग भी करेगा।- डॉ. मेजर विशाल शर्मा, सचिव, स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला
जान सकेंगे कौन से स्कूल में कैसी व्यवस्थाएं
सरकारी और निजी स्कूलों की ओर से की गई खुद की असेसमेंट अभिभावक भी शिक्षा बोर्ड की वेबसाइट पर देख सकेंगे। इससे वे जान पाएंगे कि किस स्कूल में कौन-सी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जैसे खेल का मैदान है या नहीं, स्मार्ट अन्य गतिविधियों की स्थिति क्या है। इससे अभिभावकों के लिए आसान होगा। बच्चों के लिए स्कूल चुनना अभिभावकों के लिए आसान होगा।
स्कूल ग्रेडिंग के फायदे
पारदर्शिता: स्कूलों की पढ़ाई, खेल, अधोसंरचना, गतिविधियों की वास्तविक स्थिति पता चलेगी
सुविधा : अभिभावक ग्रेड देखकर बच्चों को किस स्कूल में दाखिला दिलाना है तय करेंगे।
प्रतिस्पर्धा: सरकारी और निजी स्कूलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, गुणवत्ता में सुधार होगा।
आत्ममूल्यांकन : स्कूल अपनी कमियां जान सकेंगे और उसे दूर कर पाएंगे।
सुधार : ग्रेडिंग बढ़ाने के लिए स्कूल नई सुविधाएं और बेहतर गतिविधियां शुरू करेंगे।