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‘नमामि गंगे’ की तर्ज पर हिमाचल की नदियां भी होंगी स्वच्छ

Sat, 29 Jun 2019 11:05 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 29 Jun 2019 11:05 AM IST
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Himachal rivers will also be clean on thelines of 'Namami Ganga' project
- फोटो : अमर उजाला

गंगा सफाई के बाद अब केंद्र सरकार का फोकस नमामि गंगे की तर्ज पर सिंधु नदी बेसिन की सतलुज, ब्यास, रावी, चिनाब और झेलम नदियों को स्वच्छ करने का है। भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद ने केंद्र के निर्देश पर शिमला स्थित हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान (एचएफआरआई) को इन नदियों की सफाई के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी है। 

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18 महीने के अंदर तैयार होने वाली इस रिपोर्ट में नदियों की खुद सफाई की क्षमता को बढ़ाने के अलावा नदी बेसिन की वर्तमान स्थिति, अतीत में किए गए नदी प्रबंधन के कार्यों का आंकलन और विश्लेषण, हितधारकों की पहचान करना और उनकी मदद से नदियों को बचाने के लिए रूपरेखा तैयार करना, नदी जल अधिग्रहण क्षेत्र की जैव विविधता और वन प्रकारों की स्थितियों का आकलन करना शामिल है। 
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खास बात यह है कि इस डीपीआर को बनाने के लिए संबंधित नदी व छोटे जल विभाजन क्षेत्रों के अलावा सभी सहायक नदियां भी अध्ययन क्षेत्र में शामिल होंगी। संस्थान के प्रभारी निदेशक सत्य प्रकाश नेगी ने बताया कि नदियों और सहायक नदियों का पूरा जल अधिग्रहण क्षेत्र मुख्य नदी के तट के दोनों ओर के पांच किलोमीटर और सहायक नदी के दो किलोमीटर वाले बफर जोन के तौर पर चिह्नित कर वानिकी कार्यों के लिए निर्धारित किया जाएगा। 

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डीपीआर बनाने को दो दिन शिमला में होगी चर्चा 

इस डीपीआर को बनाने के लिए शुक्रवार को संस्थान की ओर से होटल हालीडे होम में दो दिवसीय कार्यशाला शुरू हुई। पहले दिन वन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर मुख्य अतिथि रहे।उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों की नदियां, पहाड़ों तथा मैदानी इलाकों में जनसंख्या के एक बड़े भाग की आजीविका को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं।

उन्होंने नदियों और राज्य सरकारों की प्राथमिकताओं को उजागर करते हुए कहा कि इस कार्य में विभिन्न विभागों की सहभागिता और सहयोग बहुत जरूरी है। इस अवसर पर पीसीसीएफ अजय कुमार, पंजाब के पीसीसीएफ जितेंद्र शर्मा, पीसीसीएफ वन्य जीव डॉ. सविता, एचएफआरआई के प्रभारी निदेशक सत्यप्रकाश नेगी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। 

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