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Shimla News: सुपर कंप्यूटिंग प्रणाली से जुड़ेगा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय
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राष्ट्रीय सुपर कंप्यूटिंग मिशन में विवि के यूआईटी संस्थान का चयन, पांच शोध केंद्रों को भी मिलेगा लाभ
जटिल वैज्ञानिक गणनाओं में मिलेगी मदद
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला सुपर कंप्यूटिंग प्रणाली से जुड़ेगा। इससे विवि के उच्च तकनीकी शोध कार्यों को गति मिलेगी।
विवि के प्रौद्योगिकी संस्थान (यूआईटी) को राष्ट्रीय सुपर कंप्यूटिंग मिशन के तहत परम शवक प्रणाली स्थापित करने के लिए चुना है। इसका पांच संस्थानों को लाभ मिलेगा। मिशन का क्रियान्वयन उन्नत कंप्यूटिंग विकास केंद्र के माध्यम से किया जा रहा है। परम शवक प्रणाली सी-डैक द्वारा विकसित एक कॉम्पैक्ट, टेबल-टॉप सुपरकंप्यूटर-इन-ए-बॉक्स प्रणाली होती है। विश्वविद्यालय को इस चयन की जानकारी अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद से मिली है। संस्थान के प्रस्ताव का मूल्यांकन करने के बाद यह चयन किया गया। प्रस्ताव निदेशक प्रो. अमरजीत सिंह, डॉ. श्याम, डॉ. प्रवीण और डॉ. बलवीर सिंह ठाकुर ने तैयार किया था। नई प्रणाली से विश्वविद्यालय में उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग सुविधा उपलब्ध होगी। इससे जटिल वैज्ञानिक गणनाओं और सिमुलेशन (वास्तविक प्रक्रिया) में मदद मिलेगी। आंकड़ों के विश्लेषण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मॉडलिंग से जुड़े शोध को भी गति मिलेगी। तकनीक आधारित शैक्षणिक गतिविधियों के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाएगा। इस सुविधा से प्रौद्योगिकी संस्थान के विद्यार्थियों और शोधार्थियों को उन्नत संसाधन मिलेंगे।
शिक्षक भी उच्च स्तरीय गणनाओं के लिए इसका उपयोग कर सकेंगे। इससे विभिन्न विषयों को जोड़कर शोध करने की संभावनाएं बढ़ेंगी। विश्वविद्यालय के पांच शोध केंद्र भी इस सुविधा का उपयोग कर सकेंगे। इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं साइबर-भौतिक प्रणाली केंद्र शामिल है। हरित ऊर्जा एवं नैनो प्रौद्योगिकी केंद्र भी इससे जुड़ेगा। आपदा जोखिम न्यूनीकरण, पहाड़ी संस्कृति एवं विरासत और रामानुजन केंद्र को भी इसका लाभ मिलेगा।
अब पूरी करनी होंगी औपचारिकताएं
कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने चयन पर विश्वविद्यालय समुदाय को बधाई दी। उन्होंने कहा कि उन्नत कंप्यूटिंग सुविधा से शोध के नए अवसर खुलेंगे। विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जुड़े कार्यों को इससे मजबूती मिलेगी। विश्वविद्यालय प्रशासन को अब संबंधित अधिकारियों से समन्वय करना होगा। स्थापना से पहले जरूरी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद प्रणाली को विश्वविद्यालय में स्थापित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। कुलपति ने इसे विश्वविद्यालय की शोध क्षमता बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।
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जटिल वैज्ञानिक गणनाओं में मिलेगी मदद
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला सुपर कंप्यूटिंग प्रणाली से जुड़ेगा। इससे विवि के उच्च तकनीकी शोध कार्यों को गति मिलेगी।
विवि के प्रौद्योगिकी संस्थान (यूआईटी) को राष्ट्रीय सुपर कंप्यूटिंग मिशन के तहत परम शवक प्रणाली स्थापित करने के लिए चुना है। इसका पांच संस्थानों को लाभ मिलेगा। मिशन का क्रियान्वयन उन्नत कंप्यूटिंग विकास केंद्र के माध्यम से किया जा रहा है। परम शवक प्रणाली सी-डैक द्वारा विकसित एक कॉम्पैक्ट, टेबल-टॉप सुपरकंप्यूटर-इन-ए-बॉक्स प्रणाली होती है। विश्वविद्यालय को इस चयन की जानकारी अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद से मिली है। संस्थान के प्रस्ताव का मूल्यांकन करने के बाद यह चयन किया गया। प्रस्ताव निदेशक प्रो. अमरजीत सिंह, डॉ. श्याम, डॉ. प्रवीण और डॉ. बलवीर सिंह ठाकुर ने तैयार किया था। नई प्रणाली से विश्वविद्यालय में उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग सुविधा उपलब्ध होगी। इससे जटिल वैज्ञानिक गणनाओं और सिमुलेशन (वास्तविक प्रक्रिया) में मदद मिलेगी। आंकड़ों के विश्लेषण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मॉडलिंग से जुड़े शोध को भी गति मिलेगी। तकनीक आधारित शैक्षणिक गतिविधियों के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाएगा। इस सुविधा से प्रौद्योगिकी संस्थान के विद्यार्थियों और शोधार्थियों को उन्नत संसाधन मिलेंगे।
शिक्षक भी उच्च स्तरीय गणनाओं के लिए इसका उपयोग कर सकेंगे। इससे विभिन्न विषयों को जोड़कर शोध करने की संभावनाएं बढ़ेंगी। विश्वविद्यालय के पांच शोध केंद्र भी इस सुविधा का उपयोग कर सकेंगे। इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं साइबर-भौतिक प्रणाली केंद्र शामिल है। हरित ऊर्जा एवं नैनो प्रौद्योगिकी केंद्र भी इससे जुड़ेगा। आपदा जोखिम न्यूनीकरण, पहाड़ी संस्कृति एवं विरासत और रामानुजन केंद्र को भी इसका लाभ मिलेगा।
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अब पूरी करनी होंगी औपचारिकताएं
कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने चयन पर विश्वविद्यालय समुदाय को बधाई दी। उन्होंने कहा कि उन्नत कंप्यूटिंग सुविधा से शोध के नए अवसर खुलेंगे। विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जुड़े कार्यों को इससे मजबूती मिलेगी। विश्वविद्यालय प्रशासन को अब संबंधित अधिकारियों से समन्वय करना होगा। स्थापना से पहले जरूरी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद प्रणाली को विश्वविद्यालय में स्थापित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। कुलपति ने इसे विश्वविद्यालय की शोध क्षमता बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।
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