सरकारी होटलों में वीआईपी के नाम पर मुफ्तखोरी रोकने को कसी नकेल
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हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एचपीटीडीसी) के होटलों में मुफ्तखोरी रोकने को प्रबंधन ने नकेल कस दी है। पर्यटन निगम की प्रबंध निदेशक ने फरमान जारी कर कहा है कि होटलों में ठहरने से पूर्व वीआईपी के नाम रजिस्टर में दर्ज करने होंगे। खाने, पानी के ऑर्डर के लिए किचन ऑर्डर टिक ट (केओटी) काटने के कड़े निर्देश भी दिए हैं।
ऑक्यूपेंसी रजिस्टर को होटल के फ्रंट आफिस और हाउस कीपिंग स्टाफ को मेंटेंन करना होगा। बिना केओटी काटे किसी को भी भोजन नहीं परोसा जाएगा। केसीआर भी दैनिक आधार पर तैयार करने को कहा गया है। प्रबंध निदेशक ने सभी डीजीएम, एजीएम, वरिष्ठ प्रबंधकों और डीडीओ को पत्र भेजे हैं ताकि होटलों में मुफ्तखोरी को रोका जा सके।
होटलों को आर्थिक चपत
एचपीटीडीसी के होटलों में कई वीआईपी पदों की धौंस जमाकर मुफ्तखोरी करते रहे हैं। निगम के होटलों में तैनात अफसर और कर्मचारी इस मुफ्तखोरी के खिलाफ मुंह तक नहीं खोल सकते हैं। निगम के अफसरों और कर्मचारियों की इस हालत के चलते निगम के होटलों को आर्थिक चपत भी लग रही है।
बताते हैं कि वीआईपी की धौंस जमाकर होटलों में मुफ्त में ठहरने और खाना खाने से निगम को आर्थिक नुकसान हो रहा था। पर्यटन निगम की प्रबंध निदेशक कुमुद सिंह ने पत्र संख्या एमआईएस(आईएनएस) एडमिन/2018 जारी किया है। इस पत्र में निगम के सभी डीजीएम, एजीएम, वरिष्ठ प्रबंधकों और डीडीओ को पत्र भेजा है।
इस पत्र में कहा गया है कि उनके संज्ञान में आया है कि कुछ वीआईपी और पर्यटक निगम के होटल परिसरों में मुफ्त ठहरते हैं। इस कारण इस गलत प्रथा को तुरंत रोका जाए। उधर, एचपीटीडीसी की एमडी कुमुद सिंह कहती हैं कि उनको कोई सूचना नहीं है कि इस संबंध में कोई पत्र जारी किया गया है।