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1800 एसएमसी शिक्षकों का सेवा विस्तार खत्म, सताने लगा भविष्य का खतरा
Wed, 01 Jan 2020 06:08 PM IST
अरविन्द ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Wed, 01 Jan 2020 06:08 PM IST
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स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के तहत प्रदेश के शीतकालीन स्कूलों में नियुक्त 1800 शिक्षकों का सेवा विस्तार समाप्त हो गया है। इन शिक्षकों से 31 दिसंबर तक सेवाएं लेने का सरकार से करार हुआ था। नए शैक्षणिक सत्र के लिए सेवा विस्तार नहीं मिलने से शिक्षकों को भविष्य का खतरा सता रहा है। एसएमसी से लगे शिक्षक बीते आठ सालों से नीति बनाने की मांग कर रहे हैं।
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एसएमसी पीरियड बेसिस संघ के अध्यक्ष मनोज रौंगटा ने बताया है कि 1800 शिक्षकों में 1000 सीएंडवी, 650 टीजीटी और 150 जेबीटी का सेवा विस्तार समाप्त हो गया है। उन्होंने बताया कि साल 2012 में भाजपा सरकार ने 257 अध्यापकों की नियुक्ति एसएमसी से की थीं।
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उसके बाद कांग्रेस के कार्यकाल में 2400 एसएमसी अध्यापक लगे। सभी अध्यापक टेट की योग्यता के साथ आरटीई की योग्यता को पूर्ण करते हैं। एसएमसी अध्यापक आठ सालों से बिना अवकाश के प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं।
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एसएमसी अध्यापकों पर सुप्रीम कोर्ट में कोई भी मामला विचाराधीन न होने के चलते सरकार नीति बना सकती है। अध्यक्ष मनोज रौंगटा ने कहा कि जब सरकार उर्दू और पंजाबी तथा तकनीकी संस्थान में कार्यरत पीरियड बेसिस अध्यापकों को अनुबंध नीति में ला सकती है तो एसएमसी अध्यापकों के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है। संघ ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज से एसएमसी अध्यापकों के लिए जल्द नीति बनाने की मांग की है।