फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal Pradesh Sanyukt Kisan Manch sanyojak Harish Chauhan statement on farm laws cancelled

हरीश चौहान बोले- कृषि कानूनों की वापसी किसानों, बागवानों की जीत

Fri, 19 Nov 2021 08:35 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो/संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला/पांवटा साहिब (सिरमौर)
अमर उजाला ब्यूरो/संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला/पांवटा साहिब (सिरमौर) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Fri, 19 Nov 2021 08:35 PM IST
सार

कांग्रेस विधायक विक्रमादित्य सिंह ने केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानून रद्द करने के फैसले का स्वागत किया है। उन्हें इसे किसानों की जीत करार दिया है। कहा कि लंबे समय बाद मोदी सरकार की आंखें खुली हैं।

विज्ञापन
Himachal Pradesh Sanyukt Kisan Manch sanyojak Harish Chauhan statement on farm laws cancelled
संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश सब्जी और फल उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान ने केंद्र सरकार के तीनों नए कृषि कानून वापस लेने पर कहा कि यह फैसला देश के लाखों किसानों और बागवानों की जीत है। हरीश चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार देश के सात सौ किसानों को शहीद होने से बचा सकती थी, अगर ये तीनों कानून समय पर वापस ले लिए जाते। जब सरकार को ये कानून वापस लेने ही थे तो इतना इंतजार क्यों किया।

विज्ञापन


सरकार ने चाहे वर्ष 2024 के चुनाव को देखते हुए ये कृषि कानून वापस लिए या किसी अन्य दबाव में, पर इतना जरूर है कि इससे देश के किसानों को काफी राहत मिली है। दूसरी ओर, हिमाचल किसान संघर्ष समिति के महासचिव संजय चौहान ने कहा कि अब देश और किसानों की जमीन को बिकने से बचाया जा सकेगा। यह आम किसानों और लोगों की ताकत ही है, जिसके आगे सरकार को झुकना पड़ गया है।  
विज्ञापन


न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए जारी रहेगी जंग: तंवर
केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ संघर्ष कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा के प्रमुख घटक अखिल भारतीय किसान सभा की राज्य इकाई ने कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा का स्वागत किया है। किसान सभा ने इसे किसान आंदोलन की जीत और ऐतिहासिक जीत करार दिया है। सभा के अध्यक्ष कुलदीप तंवर ने प्रधानमंत्री की इस घोषणा के बाद कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए किसानों का संघर्ष जारी रहेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


संघर्ष का क्या स्वरूप होगा और क्या तरीके होंगे, इसका फैसला संयुक्त किसान मोर्चा के दिशानिर्देशों के बाद ही तय किया जाएगा। तंवर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में किसानों के कई मुद्दे बाकी हैं, जिन पर किसानों को राष्ट्रीय आंदोलन की तर्ज पर संघर्ष करना होगा। प्रदेश में अभी तक न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा है। जिन फ सलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया भी गया है, तो आम किसान उससे वंचित हैं।

प्रदेश में अनाज की खरीद के लिए नियमित मंडियां अभी तक स्थापित नहीं हुई हैं। जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर प्रदेश के किसान सेब के लिए एमआईएस मांग रहे है। सब्जियों के लिए न तो समर्थन मूल्य मिलता है, और न ही प्राकृतिक आपदा में फसलें बर्बाद होने पर उचित मुआवजा मिलता है। बागवानी सहित सब्जियों और फसलों के लिए दी जाने वाली सब्सिडी सरकार ने समाप्त कर दी है। 

किसानों की एकता के आगे झुकी सरकार: राकेश सिंघा
हिमाचल किसान सभा के पूर्व महासचिव और ठियोग के विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि सरकार ने किसान आंदोलन को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कभी उन्हें आतंकवादी, कभी खालिस्तानी कह कर बदनाम करने की साजिश की जो नाकाम रही। हरियाणा, पंजाब, सिख, जाट, अमीर किसान, गरीब किसान के बीच बांटने की कोशिश की गई, लेकिन किसानों की एकजुटता के आगे सरकार को आखिरकार घुटने टेकने पड़े। 

लंबे समय बाद खुलीं मोदी सरकार की आंखें: विक्रमादित्य
कांग्रेस विधायक विक्रमादित्य सिंह ने केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानून रद्द करने के फैसले का स्वागत किया है। उन्हें इसे किसानों की जीत करार दिया है। कहा कि लंबे समय बाद मोदी सरकार की आंखें खुली हैं। एक साल से अधिक समय तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंदोलनरत किसानों से बात तक नहीं की। आज एकाएक दूरदर्शन पर प्रकट होकर तीनों कानूनों को रद्द करने की घोषणा की। 

अब जब पांच राज्यों में चुनाव की बेला शुरू होने वाली है। ऐसे में उन्होंने तीनों कृषि कानूनों को रद्द कर राजनीतिक लाभ लेने का जो प्रयास किया है, उसमें उन्हें कोई सफलता नहीं मिलेगी। प्रदेश में हुए चार उप चुनाव परिणामों के बाद देश में भाजपा को जो झटका लगा है, उसके बाद डीजल, पेट्रोल के मूल्यों में कमी के बाद किसानों पर थोपे तीन कृषि कानून रद्द कर देश में लोगों के गुस्से को शांत करने का यह असफल प्रयास है।

विक्रमादित्य ने कहा कि प्रदेश में हुए उपचुनाव के परिणामों के बाद देश-प्रदेश में लोगों की समस्याएं नजर आने लगी हैं। इससे साफ है कि मोदी सरकार ने हमेशा स्वार्थ की राजनीति कर देश के लोगों को गुमराह किया। कहा कि देश में बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी से लोग त्रस्त हैं। केंद्र और प्रदेश सरकार लोगों को राहत देने में पूरी तरह विफल रही है।

सरकार की आंखों से हटी अंधकार की पट्टी : अनिंदर नॉटी

Himachal Pradesh Sanyukt Kisan Manch sanyojak Harish Chauhan statement on farm laws cancelled
अनिंदर नॉटी - फोटो : अमर उजाला

भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष अनिंदर सिंह नॉटी ने कहा कि प्रधानमंत्री और सरकार की आंखों से आखिरकार अहंकार और अंधकार की पट्टी हट गई। यह विश्व का सबसे बड़ा आंदोलन था, जिसमें 700 से अधिक किसानों ने शहादत दी है। 

नॉटी ने कहा कि गुरु पर्व के दिन प्रधानमंत्री ने तीनों कृषि कानून वापस लेने की घोषणा की है। सरकार को किसानों के लंबे संघर्ष के बाद झुकाया है। देश के 28 प्रांतों में किसान आंदोलन फैल चुका था। किसानों पर आंदोलन जीवी, देश विरोधी, षड्यंत्रकारी समेत कई ऐसे आरोप थे, जिससे आंदोलन को खत्म किया जा सके। 

संयुक्त किसान मोर्चा के लंबे संघर्ष के चलते प्रकाश पर्व पर देश के किसानों की जीत हो सकी है। अभी संघर्ष जारी रहेगा। देश की सांसद के माध्यम से बिल खारिज होगा। अभी कुछ प्रश्न बाकी हैं। प्रस्तावित बिजली संशोधन बिल-2020 से निजी क्षेत्र में बिजली जाने से खेती और घरेलू बिजली महंगी होगी।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर केंद्र सरकार की स्थिति अभी तक साफ नहीं है ऐसे में अभी संघर्ष जारी रहेगा। इस अवसर पर जसविंदर सिंह, हरीश चौधरी, गुरजीत सिंह नंबरदार, चरणजीत सिंह,अर्जुन सिंह, गुरनाम सिंह और जगजीत सिंह मौजूद रहे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed