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Himachal Panchayat Chunav: सुप्रीम कोर्ट ने दिए आदेश, कहा- 31 मई से पहले हर हाल में चुनाव करवाने होंगे

Fri, 13 Feb 2026 12:22 PM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Fri, 13 Feb 2026 12:22 PM IST
सार

Himachal Panchayat Chunav: Update: सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव 31 मई से पहले हर हाल में करवाने का आदेश दिया है। 

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Himachal Panchayat Elections Supreme Court orders elections to be held before May 31
पंचायत चुनाव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव 31 मई से पहले हर हाल में करवाने का आदेश दिया है। शुक्रवार को राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने सरकार की उन दलीलों को खारिज कर दिया है, जिसमें परिसीमन का हवाला देकर समय बढ़ाने की मांग की थी। खंडपीठ ने कहा कि परिसीमन के गठन का अधूरा काम चुनाव टालने का कोई वैध कारण नहीं है। खंडपीठ ने हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हालांकि, अदालत ने चुनाव की समय सीमा में आंशिक संशोधन करते हुए नई तारीखें तय की हैं।  खंडपीठ ने आरक्षण रोस्टर तैयार करने की समय सीमा को 28 फरवरी से बढ़ाकर 31 मार्च किया है। सरकार को इस समय सीमा के भीतर हर हाल में आरक्षण रोस्टर फाइनल करना होगा। 

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 इसके बीच ही वोटर लिस्ट, पुनर्सीमांकन और आपत्तियां दायर की जाएंगी। कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए स्पष्ट किया कि इसके बाद समय विस्तार के लिए किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। अदालत ने सभी विभागों को एकजुट होकर काम करने और चुनाव का शेड्यूल फाइनल करने के आदेश दिए हैं। राज्य चुनाव आयोग, पंचायती राज एवं शहरी निकाय विभाग और प्रशासन को जल्द चुनाव की अधिसूचना जारी करने को कहा है। हिमाचल में पंचायतों का पांच वर्षीय कार्यकाल 31 जनवरी और 50 शहरी निकायों का कार्यकाल 18 जनवरी को पूरा हो चुका है। प्रदेश में 3577 पंचायतें, 90 पंचायत समितियां, 11 जिला परिषद और 71 शहरी स्थानीय निकाय हैं। अभी इनमें प्रशासक नियुक्त हैं।
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राज्य सरकार ने मांगा था अक्तूबर तक का समय
राज्य सरकार की ओर सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखा गया कि जिला परिषद, नगर परिषद और कुछ पंचायतों के पुनर्गठन और परिसीमन का काम अभी पूरा नहीं हुआ है, इसलिए सरकार को चुनाव करवाने के लिए अक्तूबर तक का समय चाहिए। ओबीसी कैटेगरी का रोस्टर, जनगणना न होने और प्रदेश में आई प्राकृतिक आपदा की वजह से अभी चुनाव करवाना संभव नहीं है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे अनुपलब्ध आधार बताते हुए खारिज कर दिया। शीर्ष अदालत ने तारीखों में आंशिक बदलाव करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय ने फैसले को पारित करते हुए कोई गलती नहीं की है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में चुनाव को लेकर सारी स्थिति पहले ही स्पष्ट की है। वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि सांविधानिक संस्थाओं के चुनाव समय पर होने चाहिए। सरकार प्राकृतिक आपदा का हवाला देकर पंचायती चुनाव लंबे समय तक नहीं टाल सकती है।

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सरकार ने दो मुख्य बिंदुओं पर दी थी हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती
हिमाचल हाईकोर्ट ने 9 जनवरी को चुनाव आयोग और प्रदेश सरकार को 30 अप्रैल से पहले पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव करवाने के आदेश दिए थे। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इसमें दो कानूनी बिंदु शामिल किए थे। पहला, हाईकोर्ट की खंडपीठ ने प्रदेश सरकार को पंचायती चुनाव संस्थाओं का रोस्टर जारी करने के लिए केवल चार दिन का समय दिया है, जोकि न्याय संगत नहीं है। वहीं, दूसरा महत्वपूर्ण सवाल डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट से संबंधित था। प्रदेश में डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लागू होने पर क्या पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों के प्रावधानों को कुछ समय के लिए टाला जा सकता है या नहीं।

हाईकोर्ट ने 28 फरवरी तक रोस्टर, 30 अप्रैल से पहले चुनाव कराने को कहा था
हिमाचल हाईकोर्ट के न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने राज्य चुनाव आयोग, पंचायती राज विभाग और शहरी विकास विभाग को निर्देश दिया था कि आपसी खींचतान खत्म कर मिलकर काम करें। अदालत ने कहा था कि जहां पर पुनर्सीमांकन का कार्य पूरा हो चुका है वहां आरक्षण रोस्टर का काम तुरंत किया जाए, लेकिन जहां पर नहीं, वहां 28 फरवरी तक पूरा कर 30 अप्रैल तक चुनाव करवाएं। कोर्ट ने कहा था कि राज्य आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत जारी आदेश सांविधानिक जनादेश को दरकिनार नहीं कर सकते हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था यदि नए परिसीमन में देरी हो रही है, तो चुनाव 2011 की जनगणना और पिछले परिसीमन के आधार पर कराए जा सकते हैं।

नई पंचायतों की जल्द हो सकती है अधिसूचना
प्रदेश की 31 पंचायतों के पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन के प्रस्ताव सरकार के पास आए थे। अब सरकार का दावा है कि इनका पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन पूरा कर लिया गया है। हालांकि, इसकी अधिसूचना अभी जारी नहीं हुई है। पंचायतीराज मंत्री ने कहा कि नई पंचायतों की अधिसूचना जल्द जारी कर दी जाएगी।

क्या बोले मंत्री
सुप्रीम कोर्ट का फैसला सम्माननीय है। 31 मई से पहले हिमाचल में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव कराए जाएंगे। हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल से पहले चुनाव कराने को कहा था, सरकार को एक महीने का समय और मिला है। इस बीच चुनाव की सभी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पंचायतों के पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। - अनिरुद्ध सिंह, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री

- सुप्रीम कोर्ट ने 31 मई से पहले चुनाव कराने को कहा है। राज्य निर्वाचन आयोग की तैयारियां पूरी हैं। मतदाता सूचियाें का प्रकाशन और प्रिटिंग का काम पूरा हो गया है। राज्य निर्वाचन आयोग को अब रोस्टर का इंतजार है। - सुरजीत सिंह राठौर, राज्य निर्वाचन आयोग

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