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बयान के बहाने मंडी उपचुनाव निशाने पर तो नहीं

Mon, 05 Jul 2021 11:23 AM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 05 Jul 2021 11:23 AM IST
सार

दरअसल, मंडी लोकसभा क्षेत्र में अगले दो महीने में उप चुनाव संभावित हैं और इन चुनावों में सबसे ज्यादा मजबूती के साथ जिस नेता का बतौर प्रत्याशी नाम चल रहा है वह महेंद्र सिंह ही हैं।

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Himachal Pradesh Jal Shakti Minister Mahender Singh Statement in connection with Byelection in mandi
जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के करीबी और मंडी जिले के कद्दावर नेता माने जाने वाले जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर के शिक्षकों को लेकर दिए गए बयान के सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं। महेंद्र सिंह के लिए कहा जाता है कि वह हर कदम अपने वोट बैंक को मद्देनजर रखते हुए उठाते हैं। ऐसे में उनके बयान को लोग अनायास दिया गया बयान नहीं मान रहे। 

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दरअसल, मंडी लोकसभा क्षेत्र में अगले दो महीने में उप चुनाव संभावित हैं और इन चुनावों में सबसे ज्यादा मजबूती के साथ जिस नेता का बतौर प्रत्याशी नाम चल रहा है वह महेंद्र सिंह ही हैं। महेंद्र को यहां उपचुनाव प्रभारी भ्ाी बनाया गया है। चूंकि किशन कपूर को कैबिनेट से इस्तीफा दिलाकर कांगड़ा संसदीय सीट से उतारा गया और उसके बाद वह प्रदेश की सक्रिय राजनीति से कुछ हद तक दूर हो गए। ऐसे में संभव है कि महेंद्र सिंह ने जानकर यह बयान दिया। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि जिस शिक्षक वर्ग पर उन्होंने निशाना साधा है उस पर खुद सरकार भी हाथ रखने से कतराती रही है।
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इसका जीता जागता उदाहरण तबादला नीति है जो पिछले तीन साल से तैयार होने के बावजूद लागू नहीं की जा सकी। इसके पीछे सिर्फ सरकारी कर्मचारियों में सबसे बड़े कैडर माने जाने वाले शिक्षक वर्ग के नाराज होने का डर है। ऐसे में महेंद्र सिंह के इस बयान ने सियासी हलके में बवाल मचा दिया है। माना जा रहा है कि शिक्षक वर्ग इस मसले पर चुप नहीं बैठेगा और इसका फायदा परोक्ष रूप से महेंद्र सिंह को ही मिल सकता है और पार्टी को दूसरा प्रत्याशी चुनना पड़ सकता है। 
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मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने किस संदर्भ में बयान दिया है इसकी जानकारी नहीं है। लेकिन कोरोना काल में सभी कर्मचारियों ने किसी न किसी रूप में अपनी सेवाएं दी हैं। शिक्षकों ने भी ऑनलाइन कक्षाओं के साथ घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ाया। प्रादेशिक सीमाओं पर भी ड्यूटियां की हैं। - सुरेश कश्यप, प्रदेश अध्यक्ष भाजपा

शिक्षक संगठनों ने खोला मोर्चा
प्रदेश सरकार के सबसे वरिष्ठ और बेबाकी के लिए मशहूर जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर के खिलाफ प्रदेश के विभिन्न शिक्षक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। शिक्षक संगठनों ने मंत्री से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने की मांग की है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से भी संज्ञान लेने की अपील की गई है। माफी न मांगने पर प्रदर्शन की चेतावनी दी गई है। 

सीएंडवी अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष चमनलाल शर्मा ने कहा कि मंत्री ने अध्यापक समाज का अपमान किया है। संघ के महासचिव देवत्त शर्मा ने कहा कि आज वो जिस पद पर आसीन हैं तो इसमें भी कहीं न कहीं अध्यापकों के आशीर्वाद से ही यह स्थान उन्हें प्राप्त हुआ है। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राज्य महामंत्री अशोक कुमार शर्मा, राज्य उपाध्यक्ष सर्वजीत सिंह राणा, प्रवक्ता महेश शारदा, कार्यालय सचिव भागचंद शर्मा, जोगिंदर शर्मा ने कहा कि मंत्री ने पूर्ण मंत्रिमंडल और मुख्यमंत्री का भी अपमान किया है, जिन्होंने फ्रंटलाइन वर्कर के प्रस्ताव को मंत्रिमंडल में पारित किया। 

राज्यपाल की भी भाषण में बेइज्जती की गई। अधिसूचना राज्यपाल ने जारी की थी। प्राथमिक सहायक अध्यापक संघ के पूर्व अध्यक्ष सुनील चौहान ने कहा कि मंत्री का बयान निंदनीय एवं शिक्षकों का मनोबल गिराने वाला है। शिक्षकों ने करोना काल में अपनी अहम भूमिका जिम्मेदारी के साथ निभाई है। 

प्रदेश शिक्षक महासंघ के प्रांत संगठन मंत्री पवन मिश्रा, अध्यक्ष पवन कुमार, उपाध्यक्ष मामराज पुंडीर ने कहा कि प्रदेश के बुजुर्ग मंत्री को अपनी भाषा पर संयम रखना चाहिए। ऐसा प्रतीत होता है कि मंत्री नहीं चाहते वर्ष 2022 में भाजपा की सरकार दोबारा बने।


उधर, प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ के अध्यक्ष केसर ठाकुर, प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष हेमराज ठाकुर, राजकीय अध्यापक संघ के अध्यक्ष नरेश महाजन और पैरा टीचर्स संघ के अध्यक्ष चितरंजन महंत और प्रेस सचिव भूपेश शर्मा ने भी जल शक्ति मंत्री के बयान की कड़ी निंदा की है। हिमाचल राजकीय संस्कृत शिक्षक परिषद ने भी टिप्पणी की निंदा की है।

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