बगलामुखी मंदिर पर सरकार मेहरबान, तहकीकात में हुआ बड़ा खुलासा
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साधन संपन्न और नामी बाहरी व्यक्तियों की ओर से बनाए गए बगलामुखी मंदिर ट्रस्ट पर जयराम सरकार खुद मेहरबान है। बगलामुखी मंदिर को संचालित करने वाले निजी ट्रस्ट से बिना पूछे सरकार उसे 3.3 करोड़ दे रही है। अमर उजाला की तहकीकात में इस बात का खुलासा हुआ है। बगलामुखी मंदिर के कायाकल्प को जयराम सरकार केंद्रीय योजना स्वदेश दर्शन के तहत 3.3 करोड़ दे रही है। निजी ट्रस्ट की मानें तो उसे पता ही नहीं कि मंदिर को सरकार 3.3 करोड़ दे रही है।
हैरत इस बात की है कि बगलामुखी मंदिर के सौंदर्यीकरण पर 3.3 करोड़ खर्च करने का प्रस्ताव कांगड़ा जिले में नहीं, बल्कि शिमला से बनाया गया है। पर्यटन विभाग कांगड़ा के अधिकारियों को सवा तीन करोड़ के प्रस्ताव की जानकारी शिमला से आए पत्र के माध्यम से मिली थी। इस राशि से बगलामुखी मंदिर बनखंडी में पार्किंग, पार्क, मंदिर का कुंड, घाट आदि भवनों का निर्माण और कायाकल्प किया जाना है।
जानकारी के अनुसार पर्यटन विभाग ने शिमला से सवा तीन करोड़ का प्रस्ताव पिछले वर्ष बनाया था। बाद में विभाग ने जिला कांगड़ा के अधिकारियों को बगलामुखी मंदिर की साइट विजिट करने के लिए पत्र लिखा। पर्यटन विभाग के अधिकारियों को तभी पता चला कि बगलामुखी मंदिर के कायाकल्प पर 3.3 करोड़ खर्च किए जाने हैं।
बगलामुखी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष रजतगिरी ने कहा कि उन्हें प्रस्ताव के बारे में जानकारी नहीं है। वह मंदिर में सरकार का एक भी पैसा नहीं लगने देंगे। रजतगिरी के बयान पर सवाल उठ रहा है कि अगर बगलामुखी मंदिर ट्रस्ट जब कह रहा है कि वह मंदिर पर सरकार का एक भी पैसा नहीं लगने देगा तो सरकार ने ट्रस्ट को बिना जानकारी दिए शिमला से खुद ही 3.3 करोड़ का प्रस्ताव क्यों और किसके निर्देशों पर बनाया।
पर्यटन विभाग जिला कांगड़ा की उपनिदेशक सुनैना शर्मा ने माना कि बगलामुखी मंदिर के कायाकल्प पर विभाग ने केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना के तहत 3.3 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव पिछले वर्ष बनाया था। यह प्रस्ताव शिमला से बनाया गया था। हमें जानकारी तब मिली जब साइट विजिट के लिए पत्र मिला। पर्यटन विकास निगम ने मंदिर के कायाकल्प के प्रस्ताव की डीपीआर बनाकर सरकार के पास जमा करवा दी है। अब केंद्र से स्वीकृति मिलने के बाद 3.3 करोड़ रुपये जारी होंगे।