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हिमाचल में नाबालिग और महिला के जबरन धर्म परिवर्तन पर होगी इतने साल की कैद, विस में बिल पेश

Thu, 29 Aug 2019 08:54 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 29 Aug 2019 08:54 PM IST
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himachal pradesh Freedom of Religion Bill 2019 laid in house of himachal assembly

किसी नाबालिग बच्चे और महिला का जबरन धर्म परिवर्तन किया तो हिमाचल में अधिकतम सात साल की कैद होगी। अनुसूचित जाति या जनजाति के लोगों के साथ भी ऐसा अपराध किया तो यही सजा होगी।

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प्रलोभन, जालसाजी या जबरन किया गया धर्म परिवर्तन गैर जमानती अपराध होगा। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने गुरुवार को विधानसभा के मानसून सत्र में प्रश्नकाल के बाद सदन में गैर कानूनी धर्मांतरण के खिलाफ हिमाचल प्रदेश धर्म की स्वतंत्रता विधेयक 2019 पेश किया।  
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इस बिल की धारा 3 में प्रावधान किया कि कोई भी व्यक्ति प्रत्यक्ष या अन्य तरह से किसी व्यक्ति को मिथ्या निरूपण, बलपूर्वक, असम्यक असर, प्रलोभन देकर या किसी अन्य कपटपूर्ण तरीके से एक धर्म से दूसरे धर्म में बदलने का प्रयास नहीं करेगा।
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अधिनियम के अधीन यह धर्म परिवर्तन नहीं माना जाएगा

न किसी को धर्म परिवर्तन के लिए उकसाएगा या षड्यंत्र करेगा। अगर कोई व्यक्ति अपने मूल धर्म में वापस आता है तो इस अधिनियम के अधीन यह धर्म परिवर्तन नहीं माना जाएगा। जो इसका उल्लंघन करेगा उसे अपराध साबित होने पर उसे कम से कम एक साल और पांच साल तक का कारावास होगा।

उसे जुर्माना भी देना होगा। अगर कोई अव्यस्क, महिला, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जाति के किसी व्यक्ति के साथ यह अपराध करेगा तो उसे कम से कम दो वर्ष और अधिकतम सात साल की कैद होगी। साथ में जुर्माना भी देना होगा। 

2006 का एक्ट खत्म होगा, नए बिल में उत्तराखंड के विधेयक से जोड़े कुछ अंश 

जबरन धर्मांतरण के खिलाफ बनाए हिमाचल प्रदेश धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम 2006 में कई व्यवस्थाएं नहीं थीं। हिमाचल सरकार ने इस विधेयक को बनाने से पहले उत्तराखंड के विधेयक से भी कुछ अंश जोड़े हैं। 

जिला मजिस्ट्रेट को सूचना न दी तो भी कैद 
धर्म परिवर्तन के इच्छुक व्यक्ति एक महीना पहले जिला मजिस्ट्रेट को सूचना देगा और उसे यह साबित करना होगा कि वह स्वेच्छा से ऐसा कर रहा है। जिला मजिस्ट्रेट ऐसी सूचना मिलने के बाद इसकी पुलिस या किसी अन्य एजेंसी से जांच करवाएगा। ऐसी ही सूचना उस धर्म पुजारी को भी देनी होगी, जो धर्मांतरण समारोह का आयोजन करवा रहा है। इसकी भी जिला मजिस्ट्रेट पुलिस या किसी अन्य एजेंसी से जांच करवाएगा। उल्लंघन होने पर एक साल की कैद और जुर्माना हो सकता है। 

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