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जंगल की आग बुझाने के दावे हवा, न तो पर्याप्त उपकरण न ही कर्मचारी
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Updated Thu, 31 May 2018 01:48 PM IST
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हिमाचल के जंगलों में आग की घटनाओं में जान माल के भारी नुकसान के बावजूद विभाग स्थिति को नियंत्रण में लाने में फेल साबित हुआ है। विभाग की विफलता की वजह से तीन दिन में आठ लोगों की जान चली गई। लाखों की निजी संपत्ति आग से स्वाह हो चुकी है। आग बुझाने के लिए विभाग की तैयारियां अधूरी है। कर्मचारियों के पास न तो पर्याप्त उपकरण है न ही संख्याबल है।
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उधर, विभाग आग की सूचना पर कर्मचारियों को मौके पर भेज अपनी पीठ थपथपा रहा है लेकिन हालात ये है कि जंगलों की आग विभाग के नियंत्रण से बाहर हो रही है। पिछले डेड़ महीने मे जंगल की आग की हज़ार से ज़्यादा घटनाएं हो चुकी है। इन घटनाओं से अब तक करीब सवा करोड़ की वन संपदा जलकर राख हो चुकी है। विभाग का दावा है कि आग को 12 घंटे के अंदर नियंत्रित किया जा रहा है।
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हालांकि जानमाल के नुकसान पर विभाग के अधिकारी कुछ भी नही बोल पा रहे। नाम ना लिखने की शर्त पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि लोगों से सतर्क रहने की अपील की जा रही है। लेकिन चूक की वजह से घटनाएं हो रही है। ये भी बताया की अग्निशमन विभाग के जरिये आबादी के आसपास की आग को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है।
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लेकिन गर्मी और हवा की वजह से दिक्कत आ रही है। उधर विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव तरुण कपूर ने बताया कि आबादी के आसपास के इलाको मे आग बुझाने के लिये हेलिकॉप्टर की व्यवस्था कर ली गयी है। वीरवार से ज़रूरत पड़ने पर उनकी सेवा ली जाएगी। इसके अलावा सभी अधिकारियों के साथ बैठक कर आग की घटनाओं से निपटने के लिये बात की जायेगी।
सिर्फ दराट और रेकर के सहारे हो रही जंगलों की रक्षा- वन विभाग के पास जंगलों को आग से बचाने के लिए सिर्फ फायर वाचर ही सबसे बड़ा साधन है। फायर वाचर के पास सिर्फ एक दराट और एक रेकर (चलारू इकट्ठा करने का उपकरण) दिया गया है। इसके अलावा वन विभाग आग से निपटने के लिए अग्निशमन विभाग का सहारा लेता है।
अग्निशमन का वाहन भी सिर्फ सड़क के आसपास वाले क्षेत्रों में ही जा पाता है। साफ है कि जंगलों को आग से बचाने के लिए इंतजाम नाकाफी हैं। वन विभाग ने अपने हर उपमंडल में जंगल क्षेत्र के आधार पर फायर वाचर तैनात किए हैं, जिनका काम आग के समय जंगलों को बचाना है। दराट व रेकर से सूबे में वन संपदा को नहीं बचाया जा सकता। हर साल करोड़ों रुपये की वन संपदा राख हो रही है।
जंगली जानवरों व पक्षियों की प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर हैं। वन विभाग धर्मशाला सर्किल के वन अरण्यपाल डीआर कौशल ने कहा कि नूरपुर, पालमपुर और धर्मशाला उपमंडल में वनरक्षकों के अलावा 182 फायर वाचर तैनात हैं, जो जंगलों को आग से बचाने के लिए जुटे हैं।
कहां कितना नुकसान- बिलासपुर जिले में आग से अब तक 3623 हेक्टेयर इलाके के जंगल जल चुके हैं। सिरमौर जिले में 2267 हेक्टेयर इलाके के जंगल राख हो गए हैं। चंबा के तीसा में कलोनीमोड़ जंगल में लगी आग में एक दर्जन पेड़ जल गए।
वहीं, भटियात उपमंडल के तहत ग्राम पंचायत परछोड़ के गांव काथलू में तीन गोशालाएं जल गई हैं।
शिमला जिले में तहसील कुमारसैन की मोगड़ा पंचायत के जंगल में दो दिन से लगी आग लोगों के बगीचों और घासनियों तक पहुंच गई। सोलन जिले में अब तक 500 हेक्टेयर जंगल आग की चपेट में आ चुके हैं।
कसौली में सेना को आग बुझाने के लिए हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल करना पड़ा। जिला कुल्लू के जंगलों में आग फिर भड़की। करोड़ों का नुकसान हुआ है। हमीरपुर में चार और जगह जंगल आग की चपेट में हैं।