गरीब बच्चों को एडमिशन नहीं देने वाले निजी स्कूल नपेंगे, मांगा ब्योरा
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समाज के कमजोर और उपेक्षित वर्ग के बच्चों को प्रवेश नहीं देने वाले निजी स्कूलों की शामत आने वाली है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला उपनिदेशकों से 30 मई तक जिलों के गरीब बच्चों को निजी स्कूल में मिले प्रवेश का ब्योरा तलब किया है। सरकार से किसी भी प्रकार की मदद नहीं लेने वाले निजी स्कूलों पर यह आदेश लागू होंगे।
निजी स्कूलों के लिए कुल दाखिल बच्चों में से समाज के कमजोर वर्गों के 25 फीसदी दाखिला देना जरूरी किया गया है। यह दाखिला बीपीएल परिवारों से संबंधित या विकलांगता से युक्त बच्चों को देना होगा। एससी, एसटी परिवारों के बच्चों को भी प्राथमिकता देनी होगी।
आरटीई के तहत ऐसा करने की व्यवस्था लागू करने के निर्देश पहले से ही हैं, मगर अब इसे सरकार सख्ती से लागू करेगी। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक मनमोहन शर्मा ने कहा है कि आरटीई नियमों के तहत निजी स्कूलों में 25 फीसदी सीटें गरीब वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित की गई है। नियमों का पालन नहीं करने वाले स्कूल प्रबंधनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बच्चे बढ़े तो ऐसे मिलेगी सीट
निशुल्क सीट के लिए आवेदन करने वाले अभिभावकों से निजी स्कूल किसी भी तरह का पंजीकरण शुल्क और प्रोस्पेक्टस शुल्क नहीं ले सकेंगे। स्कूलों को प्रवेश फार्म निशुल्क उपलब्ध करवाना होगा।
कोटे की सीटों के लिए आवेदन करने वाले बच्चों की संख्या यदि तय सीटों से अधिक बढ़ जाती है तो सीटों का बंटवारा ड्रा से होगा। अभिभावकों, एसएमसी और शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि की मौजूदगी में ड्रा होगा। अगर सीटें कम पड़ जाती है तो अन्य श्रेणियों के बच्चों को मौका दिया जाएगा।
जो निजी स्कूल सरकार या स्थानीय प्रशासन की ग्रांट के सहयोग के बिना चल रहे हैं। ऐसे स्कूलों को हर छात्र को मुफ्त में पढ़ाने की फीस राज्य सरकार लौटाएगी। प्रारंभिक शिक्षा के उपनिदेशक अपने-अपने जिलों में इस राशि का भुगतान निजी स्कूलों को करेंगे।