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अर्थव्यवस्था: कर्ज का बोझ घटाएगी हिमाचल सरकार, चार साल में ऋण-GSDP अनुपात 40.64% लाने का लक्ष्य
Sun, 20 Sep 2026 09:47 AM IST
Ankesh Dogra
अनिमेष कौशल, शिमला।
अनिमेष कौशल, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Sun, 20 Sep 2026 09:47 AM IST
सार
राजस्व संकट और बढ़ती वित्तीय देनदारियों के बीच हिमाचल प्रदेश सरकार ने पहली बार चार साल की मध्यम अवधि ऋण प्रबंधन रणनीति तैयार की है। 2026-27 से 2029-30 के लिए बनाई गई इस रणनीति में राज्य के ऋण-जीएसडीपी अनुपात को 40.64 फीसदी तक लाने का लक्ष्य रखा गया है।
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हिमाचल प्रदेश सरकार।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
राजस्व संकट, सीमित संसाधनों और बढ़ती वित्तीय देनदारियों के बीच हिमाचल प्रदेश सरकार ने कर्ज प्रबंधन का चार वर्षीय रोडमैप तैयार किया है। पहली बार बनाई गई मध्यम अवधि ऋण प्रबंधन रणनीति 2026-27 से 2029-30 के तहत सरकार ने राज्य के ऋण-जीएसडीपी अनुपात को 40.64 फीसदी पर लाने का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में यह अनुपात 43 फीसदी से अधिक है।
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सितंबर 2026 तक राज्य पर कुल कर्ज करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये पहुंच चुका है। वेतन, पेंशन, ब्याज भुगतान और विकास योजनाओं के बढ़ते खर्च के बीच सरकार अब अधिक कर्ज लेने के बजाय उसकी लागत और जोखिम कम करने पर जोर दे रही है। रणनीति के अनुसार अगले चार वर्षों में कम ब्याज दर पर संसाधन जुटाने, ऋण की औसत परिपक्वता अवधि बढ़ाने और अल्पकालिक बाजार ऋण से दूरी बनाने पर फोकस रहेगा। वित्त विभाग के अनुसार मार्च 2021 में बाजार ऋण की औसत परिपक्वता अवधि 6.96 वर्ष थी, जो मार्च 2025 में बढ़कर 8.15 वर्ष हो गई। अब इसे 2029-30 तक करीब 11 वर्ष तक ले जाने का लक्ष्य है।
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प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल उधारी लेना नहीं, बल्कि ऋण पोर्टफोलियो को अधिक टिकाऊ और कम जोखिम वाला बनाना है। रणनीति के तहत ब्याज लागत घटाने, परिपक्वता अवधि बढ़ाने और पुनर्भुगतान जोखिम कम करने पर विशेष जोर रहेगा। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर एवं अर्थशास्त्री डॉ. एनके विष्ट ने कहा कि सरकार सस्ते और दीर्घकालिक ऋण के साथ राजस्व बढ़ाने के प्रयास जारी रखती है, तो ऋण-जीएसडीपी अनुपात में सुधार संभव है।
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छोटी अवधि के कर्ज पर लगेगी लगाम
नई रणनीति में सरकार पांच साल तक की परिपक्वता वाले नए बाजार ऋण से लगभग दूरी बनाएगी। इसके बजाय 15 से 20 वर्ष या उससे अधिक अवधि के बॉन्ड के जरिये संसाधन जुटाने की योजना है। इससे एक साथ बड़ी रकम लौटाने का दबाव कम होगा और पुनर्वित्त की जरूरत भी घटेगी।
सस्ता कर्ज जुटाना प्राथमिकता राज्य के सार्वजनिक ऋण की औसत ब्याज लागत 2020-21 में 7.61 फीसदी थी, जो 2024-25 में घटकर 6.77 फीसदी रह गई। सरकार इसे और कम करने के लिए बाजार परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग अवधि के बॉन्ड जारी करेगी।
ब्याजमुक्त ऋण पर नजर
केंद्र की स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट योजना के तहत मिलने वाले 50 वर्ष अवधि के ब्याजमुक्त ऋण का अधिकतम उपयोग करने की योजना है। इससे पूंजीगत परियोजनाओं के लिए महंगे बाजार ऋण पर निर्भरता कम हो सकती है।
नई रणनीति में सरकार पांच साल तक की परिपक्वता वाले नए बाजार ऋण से लगभग दूरी बनाएगी। इसके बजाय 15 से 20 वर्ष या उससे अधिक अवधि के बॉन्ड के जरिये संसाधन जुटाने की योजना है। इससे एक साथ बड़ी रकम लौटाने का दबाव कम होगा और पुनर्वित्त की जरूरत भी घटेगी।
सस्ता कर्ज जुटाना प्राथमिकता राज्य के सार्वजनिक ऋण की औसत ब्याज लागत 2020-21 में 7.61 फीसदी थी, जो 2024-25 में घटकर 6.77 फीसदी रह गई। सरकार इसे और कम करने के लिए बाजार परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग अवधि के बॉन्ड जारी करेगी।
ब्याजमुक्त ऋण पर नजर
केंद्र की स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट योजना के तहत मिलने वाले 50 वर्ष अवधि के ब्याजमुक्त ऋण का अधिकतम उपयोग करने की योजना है। इससे पूंजीगत परियोजनाओं के लिए महंगे बाजार ऋण पर निर्भरता कम हो सकती है।