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Apple season: हिमाचल, कश्मीर और उत्तराखंड के बागवानों ने बनाया साझा मोर्चा
Mon, 18 Jul 2022 09:00 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 18 Jul 2022 09:00 PM IST
सार
हिमाचल प्रदेश सेब उत्पादक संघ के अध्यक्ष सोहन ठाकुर ने कहा कि पिछले 15 सालों में सेब की लागत 10 से 20 गुना तक बढ़ गई है, लेकिन मंडियों में इसकी कीमतों में कोई इजाफा नहीं हुआ है।
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हिमाचल प्रदेश सेब उत्पादक संघ।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सेब बागवानी पर आए संकट से निपटने के लिए हिमाचल प्रदेश, कश्मीर और उत्तराखंड के बागवानों ने साझा मोर्चा बनाया है। इसे हिमाचल के बागवानों की पहल पर श्रीनगर में बनाया गया है। जीएसटी घटाने और विदेशी सेब पर आयात शुल्क नहीं बढ़ाने से नाराज यह मोर्चा 25 जुलाई को नई दिल्ली जाकर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर से मिलेगा।
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मोर्चा कार्टन पर जीएसटी केवल पांच फीसदी रखने और आयात शुल्क 100 फीसदी करने की मांग उठा रहा है। सोमवार को मोर्चा के हिमाचल से प्रतिनिधि और हिमाचल प्रदेश सेब उत्पादक संघ के अध्यक्ष सोहन ठाकुर ने यह जानकारी शिमला में पत्रकार वार्ता में दी। आरोप लगाया कि सरकार संकट में घिरे सेब कारोबार को बचाने में फेल हो गई है।
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सोहन ने कहा कि पिछले 15 सालों में सेब की लागत 10 से 20 गुना तक बढ़ गई है, लेकिन मंडियों में इसकी कीमतों में कोई इजाफा नहीं हुआ है। कार्टन की कीमतें 15 से 20 और ट्रे के दाम 20 से 35 फीसदी तक बढ़े हैं। बीते साल मोहन फाइबर की ट्रे का एक बंडल 500 रुपये में मिल रहा था। यह इस बार 800 रुपये में मिल रहा है।
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सेब तुड़ान, भरान, ढुलाई, मंडी भाड़ा भी दोगुना हो गया है। फफूंदनाशक, कीटनाशक, खादों आदि पर मिलने वाली सब्सिडी लगभग खत्म कर दी है। 20 जुलाई को सेब उत्पादक क्षेत्रों में धरना प्रदर्शन कर ये मांगें उठाई जाएंगी। पिछले साल सरकार ने महंगे कार्टन से राहत के लिए सेब बेचने को क्रेट उपलब्ध करवाने का लॉपीपाप दिया। इस साल जीएसटी में 6 फीसदी छूट के नाम पर बेवकूफ बनाया गया है।
सेब उत्पादक संघ की अन्य मांगें
- मंडियों में किलो के हिसाब से सेब बेचने की हो व्यवस्था
- सूखे, ओलावृष्टि और बर्फबारी से हुए नुकसान का मिले मुआवजा
- कश्मीर की तर्ज पर एमआईएस में 60, 44 और 24 रुपये किलो बिके सेब