तीसरी आंख की मदद से नौ महीने में बद्दी में दबोचे 80 चोर
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प्रदेश में क्राइम रेट में अग्रणी औद्योगिक क्षेत्र बद्दी में पुलिस ने पिछले नौ महीनों में सीसीटीवी की मदद से 80 चोर पकड़े हैं। इन चोरों की पहचान के साथ उनके भागने के रूट को जानने में सीसीटीवी पुलिस के लिए मददगार साबित हुए हैं। जिसकी वजह से पुलिस की केस रिकवरी में भी कई गुना इजाफा हुआ है। बद्दी में सीसीटीवी के सार्थक परिणाम सामने आने के बाद अब पुलिस मुख्यालय ने अन्य जिलों के पुलिस अधीक्षकों को जल्द ज्यादा से ज्यादा सीसीटीवी लगवाने के निर्देश जारी किए हैं।
बद्दी पुलिस पिछले एक साल से सीसीटीवी लगाने की मैराथन कवायद में जुटी हुई है। जिले में पुलिस ने अब तक 135 सीसीटीवी खुद के बजट से जबकि, उद्योगपतियों की मदद से 850 से ज्यादा कैमरे लगा लिए हैं। वैसे तो एक जिले में हजार कैमरे बड़ी बात नहीं है। लेकिन, बद्दी पुलिस के इस सीसीटीवी कैमरों के नेटवर्क का अब पुलिसिंग पर असर दिखना शुरू हो गया है।
2019 के चोरी और सेंधमारी के मामलों के डाटा के अध्ययन में पता चला कि चोरी और सेंधमारी के कुल दर्ज 78 मामलों में जिन 109 चोरों को पकड़ा गया है, उनमें से 80 की शिनाख्त सीसीटीवी की मदद से हुई। एसपी बद्दी रोहित मालपानी ने बताया कि सीसीटीवी की मदद से चोर की पहचान तो होती है, साथ ही उसके भागने के रूट में भी यह सीसीटीवी कैमरे सहायक सिद्ध हो रहे हैं।
तकनीक के इस्तेमाल से केस रिकवरी भी बढ़ी
सीसीटीवी से पुलिस की केस रिकवरी में भी इजाफा हुआ है। 2018 में दर्ज चोरी के मामलों में जहां सिर्फ 36 फीसदी और सेंधमारी के मामलों में 8 फीसदी ही रिकवरी हो पाई थी। वहीं, सितंबर महीने तक दर्ज चोरी के मामलों में 75 फीसदी रिकवरी हो चुकी है। इसी तरह सेंधमारी के मामलों में भी रिकवरी 72 फीसदी तक पहुंच गई है।
पीएचक्यू ने अब अन्य जिलों पर दिया जोर
डीजीपी सीताराम मरडी कहते हैं कि पुलिस हर जगह नहीं पहुंच सकती लेकिन, सीसीटीवी की मदद से किसी भी घटना के होने की संभावना को कम किया जा सकता है। इसलिए सभी इंटर स्टेट बार्डर, टोल नाकों और वैकल्पिक मार्गों पर सीसीटीवी लगाए जा रहे हैं।