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हिमाचल: चौकी प्रभारी को भ्रष्टाचार और वसूली के मामले में चार साल का कठोर कारावास, जानें पूरा मामला

Thu, 08 Oct 2026 08:56 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर बुशहर।
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर बुशहर। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 08 Oct 2026 08:56 PM IST
सार

 किन्नौर जिले के भावानगर थाना क्षेत्र के वर्ष 2020 के भ्रष्टाचार मामले में रामपुर स्थित किन्नौर विशेष न्यायालय ने तत्कालीन पुलिस चौकी कटगांव के प्रभारी हेड कांस्टेबल रवि चोपड़ा को दोषी करार देते हुए चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर कुल 46 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

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Himachal: Police post in charge sentenced to four years of rigorous imprisonment in a corruption and extortion
अदालत(सांकेतिक)। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के भावानगर थाना क्षेत्र के वर्ष 2020 के भ्रष्टाचार मामले में रामपुर स्थित किन्नौर विशेष न्यायालय ने तत्कालीन पुलिस चौकी कटगांव के प्रभारी हेड कांस्टेबल रवि चोपड़ा को दोषी करार देते हुए चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर कुल 46 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। 24 अप्रैल 2020 को आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 323, 504, 506 और 384 सहित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

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अभियोजन के अनुसार 16 अप्रैल 2020 की रात कुछ युवक काफनू स्थित शराब की दुकान पर पहुंचे थे। दुकान बंद होने के कारण उन्होंने शटर पर लात मारी। इसके बाद दुकान के शटर और बल्ब को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई। अगले दिन पुलिस ने युवकों को पूछताछ के लिए पुलिस चौकी कटगांव बुलाया। मामले में शराब दुकान के नुकसान को लेकर समझौता कराने की प्रक्रिया शुरू हुई। अभियोजन का आरोप था कि पुलिस पोस्ट के प्रभारी रवि चोपड़ा ने युवकों को डराया-धमकाया, उनके साथ मारपीट की और गंभीर धाराओं में मामला दर्ज करने की धमकी देकर 60 हजार रुपये की मांग की।

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यह राशि शराब दुकान के नुकसान के समझौते के नाम पर मांगी गई थी। अदालत ने मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से पेश 39 गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्यों पर विचार किया। जांच के दौरान बैंक खातों में हुए लेन-देन, मोबाइल फोन, व्हाट्सएप चैट और अन्य साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया। रिकॉर्ड के अनुसार 19 अप्रैल 2020 को आरोपी के खाते में 50 हजार रुपये जमा हुए थे। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने पुलिस पद और वर्दी का दुरुपयोग करते हुए पीड़ितों को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी और समझौते के नाम पर रकम ली। अदालत ने इस कृत्य को सार्वजनिक विश्वास को ठेस पहुंचाने वाला गंभीर अपराध माना और दोषी को सजा में राहत देने से इन्कार किया।

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