नाराजगी: पुलिस कांस्टेबलों ने रपट डालकर फिर छोड़ा मेस का खाना, सोशल मीडिया पर छेड़ी जंग
दावा किया जा रहा है कि अगर सरकार मांग नहीं मानती है तो अब जवानों के परिजन ही बड़ा आंदोलन करने को मजबूर हो जाएंगे। उधर, सरकार ने रविवार को मुख्यमंत्री आवास घेरे जाने पर बैठक का एलान तो किया लेकिन अब तक बैठक नहीं हो सकी है।
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हिमाचल प्रदेश के इतिहास में अपनी मांग रखने के लिए पहली बार मुख्यमंत्री आवास पर पहुंचने वाले नाराज कांस्टेबलों ने फिर से पुलिस मेस का खाना छोड़ दिया है। कई जगह कांस्टेबलों ने इसके लिए बाकायदा रोजनामचे में भी रपट डाल दी है। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर भी अपने हक को हासिल करने के लिए जंग छेड़ दी है। ई-मेल से लेकर व्हाट्सएप तक का इस्तेमाल कर जवान ‘जस्टिस फॉर एचपी पुलिस हैश टैग’ का उपयोग कर लोगों को सरकार की ज्यादती और अपनी नाराजगी का कारण बताने में जुट गए हैं। बताया जा रहा है कि पुलिस के जवान अपने हितों के लिए किसी भी तरह का आंदोलन नहीं कर सकते। ऐसे में वह अन्न त्याग आंदोलन कर रहे हैं।
अमर उजाला को भेजे गए कई ई-मेल में यह कहा गया है कि 2013 में भर्ती हुए जवानों को दो वर्ष बाद संशोधित वेतनमान दे दिया गया। लेकिन 2015 के बाद से हो रही भर्तियों में चुने जाने वाले जवानों को संशोधित वेतनमान देने के लिए आठ साल का समय निर्धारित कर दिया गया जबकि अन्य सरकारी कर्मचारियों को दो साल बाद वेतनमान में बढ़ोतरी मिल रही है। दावा किया जा रहा है कि अगर सरकार मांग नहीं मानती है तो अब जवानों के परिजन ही बड़ा आंदोलन करने को मजबूर हो जाएंगे। उधर, सरकार ने रविवार को मुख्यमंत्री आवास घेरे जाने पर बैठक का एलान तो किया लेकिन अब तक बैठक नहीं हो सकी है। जाहिर है कि सरकार के मौन और पुलिस कर्मियों के सोशल मीडिया पर सक्रिय होने से वर्दी की साख पर असर पड़ना शुरू हो गया है।