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हिमाचल पंचायत चुनाव: 2011 की जनसंख्या के आधार पर होगा इस बार आरक्षण, सरकार ने जारी किए निर्देश

Sun, 07 Sep 2025 10:36 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Sun, 07 Sep 2025 10:36 AM IST
सार

प्रदेश में पंचायत चुनावों के लिए नए सिरे से आरक्षण तय होगा। अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं के आरक्षण के लिए 2011 की जनसंख्या आधार होगी। 

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Himachal Panchayat elections: This time reservation will be based on the population of 2011, reservation will
पंचायत चुनाव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों के लिए नए सिरे से आरक्षण तय होगा। अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं के आरक्षण के लिए 2011 की जनसंख्या आधार होगी। ओबीसी आरक्षण के लिए 1993-94 के सर्वेक्षण को देखा जाएगा। पंचायत प्रधान के आरक्षण के लिए विकास खंड को इकाई बनाया जाएगा। पंचायतीराज विभाग ने उपायुक्तों को पंचायतीराज चुनाव आरक्षण रोस्टर जारी करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश जारी किए हैं। राेस्टर लागू करने का नया फाॅर्मूला भी सुझाया है। पंचायतीराज अधिनियम के तहत आरक्षण रोस्टर तय करने की प्रक्रिया जिला स्तर पर की जाएगी। इस फाॅर्मूले के अनुसार प्रधानों के आरक्षण के लिए विकास खंड को एक इकाई माना जाएगा।

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प्रधान के आरक्षण की गणना विकास खंड स्तर पर अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या के आधार पर होगी। सबसे पहले अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण रोस्टर लागू किया जाएगा। हर विकास खंड में पंचायत प्रधानों के पद उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षित किए जाएंगे। अनुसूचित जाति की जनसंख्या की अधिकता वाली ग्राम पंचायतों में सबसे पहले पद इसी जाति के लिए आरक्षित होंगे। यदि आरक्षित होने वाले प्रधानों की संख्या एक से अधिक है तो अगली अधिक जनसंख्या वाली पंचायत में प्रधान का पद आरक्षित होगा। यह क्रम तब तक जारी रहेगा, जब तक निर्धारित पद आरक्षित नहीं हो जाते। अगर किसी पंचायत में अनुसूचित जाति की जनसंख्या 5 प्रतिशत से कम है तो वह पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नहीं होगा। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कुल पदों में से 50 प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे।

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जिस पंचायत में अनुसूचित जाति की महिलाओं की संख्या सबसे अधिक है, वहां पहला पद आरक्षित किया जाएगा। अगले पदों में भी यही क्रम रहेगा। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लिए पहले सुरक्षित स्थान तय किए जाएंगे और इसके बाद महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत पद आरक्षित होंगे। यदि किसी पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जाति या जनजाति की जनसंख्या कम है तो वहां सामान्य वर्ग की महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इसी तरह पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के निर्वाचन क्षेत्रों, वार्डों का आरक्षण भी जनसंख्या अनुपात के अनुसार किया जाएगा।

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पिछड़ा वर्ग के लिए अधिकतम 15 प्रतिशत तक आरक्षण
पिछड़ा वर्ग के लिए अधिकतम 15 प्रतिशत तक आरक्षण होगा। आदेशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पंचायत समिति और जिला परिषद स्तर पर महिलाओं के लिए कुल पदों का 50 प्रतिशत आरक्षण होगा। पंचायत प्रधान, पंचायत समिति अध्यक्ष और जिला परिषद अध्यक्ष के पदों पर भी यही नियम लागू होंगे। इन पदों पर अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए आरक्षण क्रमवार रोटेशन प्रणाली से होगा। साथ ही यदि किसी पंचायत क्षेत्र या वार्ड पिछली बार किसी वर्ग के लिए आरक्षित रहा है, तो इस बार उसे सामान्य रखा जाएगा। पंचायती राज विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि आरक्षण की प्रक्रिया 2011 की जनगणना पर आधारित होगी। विभाग ने सभी उपायुक्तों और जिला पंचायत अधिकारियों को इन दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं।

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