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हिमाचल: हत्या मामले में एक दोषी जमानत पर रिहा, दूसरे की याचिका खारिज, जानें पूरा मामला

Fri, 17 Jul 2026 05:30 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 17 Jul 2026 05:30 AM IST
सार

न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने दो दोषियों की सजा निलंबन याचिकाओं पर सुनवाई की। अदालत ने एक दोषी अमरिंदर सिंह नाकरा को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया, जबकि दूसरे दोषी विशाल बंसल की याचिका खारिज कर दी।

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Himachal: One convict in murder case released on bail, another's plea rejected, know the whole matter
अदालत(सांकेतिक)। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने वर्ष 2016 के चर्चित हत्या और डकैती मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने दो दोषियों की सजा निलंबन याचिकाओं पर सुनवाई की। अदालत ने एक दोषी अमरिंदर सिंह नाकरा को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया, जबकि दूसरे दोषी विशाल बंसल की याचिका खारिज कर दी। खंडपीठ ने अमरिंदर सिंह नाकरा की सजा निलंबित करते हुए उसे जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।

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अदालत ने पाया कि अमरिंदर सिंह और सह-आरोपी युवराज सिंह की अपराध में भूमिका एक जैसी थी। सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2026 में युवराज सिंह की सजा निलंबित कर उसे पहले ही जमानत दे दी थी। हाईकोर्ट ने समानता के सिद्धांत को स्वीकार करते हुए अमरिंदर सिंह को जमानत दी। अमरिंदर सिंह करीब 10 साल और 10 महीने से जेल में बंद है। कोर्ट ने 1,00,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक स्थानीय जमानतदार की शर्त रखी। यह सजा निलंबन अपील के लंबित रहने तक प्रभावी रहेगा। यह मामला जिला ऊना के गगरेट पुलिस स्टेशन में 26 मार्च 2016 को दर्ज एफआईआर से जुड़ा है।
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विशाल बंसल की याचिका खारिज
इसी मामले के एक अन्य दोषी विशाल बंसल ने भी खुद को युवराज सिंह के समान बताते हुए जमानत मांगी थी। राज्य सरकार ने अदालत के सामने विशाल बंसल का कच्चा चिट्ठा खोल दिया। कोर्ट ने कहा कि विशाल की भूमिका अन्य दोषियों जैसी थी, पर उसका हालिया आचरण उसे दूसरों से अलग करता है। अदालत को बताया गया कि अक्तूबर 2021 में बंसल को पैरोल मिली थी।पैरोल अवधि खत्म होने के बाद वह मॉडल सेंट्रल जेल नाहन वापस नहीं लौटा और नेपाल भाग गया। बंसल करीब 1 साल, 11 महीने और 1 दिन तक फरार रहा, जिसे दिसंबर 2023 में नेपाल से गिरफ्तार किया गया। खंडपीठ ने बंसल की याचिका खारिज करते हुए कहा कि उसका आचरण आश्वासन नहीं देता। उसे जमानत पर रिहा करने पर वह कार्रवाई का सामना करने के लिए उपलब्ध रहेगा, इसकी गारंटी नहीं।

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