वोकेशनल शिक्षा में हिमाचल नंबर वन, नीति आयोग ने जारी की सूची
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स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा के लिए नीति आयोग से जारी शिक्षा गुणवत्ता सूचकांक में हिमाचल वोकेशनल शिक्षा देने में अव्वल रहा है। प्रदेश के 20 फीसदी स्कूलों में वोकेशनल शिक्षा दी जा रही है।
सूचकांक में दूसरे नंबर पर रहे महाराष्ट्र में 19.7 फीसदी स्कूलों में वोकेशनल शिक्षा शुरू हुई है। स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय बनाने में भी हिमाचल नंबर वन रहा है। प्रदेश के 100 फीसदी स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय बनाए गए हैं।
उधर, गुणात्मक शिक्षा के क्षेत्र में हिमाचल एक पायदान लुढ़क गया है। हिमाचल चौथे से पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत और मानव संसाधन विकास स्कूली शिक्षा सचिव रीना रे की मौजूदगी में इस सूचकांक को जारी किया।
सूची में हर तरह के प्रदर्शन में केरल पहले, राजस्थान दूसरे और कर्नाटक तीसरे स्थान पर है। उत्तर प्रदेश अंतिम पायदान पर है। स्कूली शिक्षा गुणवत्ता सूचकांक का संदर्भ वर्ष 2016-17 और आधार वर्ष 2015-16 को लिया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि इस सूचकांक के जारी होने से राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और इस क्षेत्र में बढ़िया करने की प्रेरणा मिलेगी। शिक्षा गुणवत्ता सूचकांक में हरियाणा 2015-16 के मुकाबले पांच पायदान ऊपर चढ़कर तीसरे नंबर पर पहुंच गया।
उत्तराखंड 4 स्थान नीचे खिसककर 14वें नंबर पर रहा। जम्मू-कश्मीर पिछली बार की तरह इस बार भी 16वें पायदान पर है। केंद्र शासित प्रदेशों में चंडीगढ़ पहले और दिल्ली दूसरे पायदान पर है। पिछली बार भी दोनों का क्रम यही था।
स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी
इस समय देश में 11.85 लाख स्कूल हैं, जिनमें शिक्षकों की भारी कमी है। कुछ राज्यों के शहरी इलाके में शिक्षकों की संख्या तो ठीक ठाक है, लेकिन दूरदराज के स्कूलों में एक शिक्षक से काम चलाया जा रहा है। कहीं-कहीं तो नियोजन वाले शिक्षकों से ही शिक्षण कार्य चल रहा है। यूपी समेत कुछ राज्य ऐसे हैं, जहां काफी अच्छा काम हुआ है। - रीना रे, स्कूली शिक्षा सचिव