{"_id":"6961044e8c039966300595c0","slug":"himachal-news-state-election-commission-has-prepared-for-election-on-the-basis-of-2011-census-2026-01-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"HP Panchayat Election: राज्य निर्वाचन आयोग ने 2011 की जनगणना के आधार की है चुनाव की तैयारी, जानें विस्तार से","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
HP Panchayat Election: राज्य निर्वाचन आयोग ने 2011 की जनगणना के आधार की है चुनाव की तैयारी, जानें विस्तार से
Sat, 10 Jan 2026 02:00 AM IST
अंकेश डोगरा
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Sat, 10 Jan 2026 02:00 AM IST
सार
हिमाचल प्रदेश में हाईकोर्ट के फैसले के बाद आयोग और सरकार की कसरत शुरू हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने फैसले के चलते अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी तैयारियां करने को कहा है। पढ़ें पूरी खबर...
विज्ञापन
राज्य निर्वाचन आयोग
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हिमाचल सरकार वार्डों के पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन करने के बाद नया रोस्टर तैयार कर चुनाव कराने की तैयारी में है जबकि राज्य निर्वाचन आयोग ने वर्ष 2011 की जनगणना को आधार मानते हुए तैयारियां की हैं। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद आयोग और सरकार की कसरत शुरू हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग पहले ही कह चुका है कि जिन पंचायतों में दिक्कत है उन पंचायतों में बाद में भी चुनाव कराए जा सकते हैं। वार्डों का नए सिरे से पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन करने में समय ज्यादा लगेगा।
विज्ञापन
हिमाचल प्रदेश में वर्तमान में पंचायतों की कुल संख्या 3,577 है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग में बैठकों का दौरा जारी रहा। हाईकोर्ट से आए फैसले के बाद सरकार ने इस मामले में कानूनी राय भी जानी। वहीं राज्य निर्वाचन आयोग ने फैसले के चलते अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी तैयारियां करने को कहा है। चुनाव कराने के लिए कितना कार्य अभी तक लंबित है। इसकी जानकारी ली।
विज्ञापन
हर जिले में एक साथ चुनाव कराने के पक्ष में आयोग
राज्य निर्वाचन आयोग हिमाचल के हर जिले में एक साथ चुनाव कराने के पक्ष में है। इसके पीछे आयोग ने तर्क दिया है कि जनवरी, फरवरी में बच्चों की परीक्षा है। ऐसे में अध्यापक व अन्य कर्मचारी व्यस्त रहते हैं। दूसरे पोलिंग स्टेशन के लिए स्कूल भी खाली चाहिए। ऐसे में हर जिले में एक साथ चुनाव कराए जा सकते हैं।
विज्ञापन