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हिमाचल: निजी स्कूलों में प्राइमरी कक्षाओं के विद्यार्थियों को स्कूल बुलाना अनिवार्य नहीं, स्कूल खुद लें फैसला

Sat, 13 Nov 2021 06:04 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sat, 13 Nov 2021 06:04 PM IST
सार

सरकारी स्कूलों के लिए सरकार ने पुराने आदेश ही बरकरार रखे हैं। हालांकि सरकारी स्कूलों में ऑफलाइन के साथ ऑनलाइन पढ़ाई भी जारी रहेगी।

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himachal News: schools management will now decide for classes of primary students
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

निजी स्कूलों के अभिभावकों के विरोध के चलते प्रदेश सरकार ने प्राइमरी कक्षाओं के विद्यार्थियों की 15 नवंबर से शुरू होने वाली नियमित कक्षाओं के आदेश को बदल दिया है। शनिवार को सरकारी छुट्टी के दिन उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से उपायुक्त शिमला, सभी जिला उपनिदेशकों और निजी स्कूलों के प्रिंसिपलों को पत्र जारी कर निजी स्कूलों में प्राइमरी कक्षाओं के विद्यार्थियों को स्कूल बुलाने का फैसला स्वयं लेने की छूट दे दी है।

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सरकार ने नौ नवंबर के आदेशों में संशोधन करते हुए निजी स्कूल प्रबंधन को एसएमसी-पीटीए से चर्चा कर इस संदर्भ में आगामी फैसला लेने की मंजूरी दे दी है। प्रदेश के शीतकालीन छुट्टियों वाले सीबीएसई और आईसीएसई के निजी स्कूलों के लिए सरकार ने यह फैसला लिया है। प्राइमरी कक्षाओं के विद्यार्थियों को स्कूलों में ना बुलाने पर ऑनलाइन कक्षाएं नियमित तौर पर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। राजधानी शिमला के निजी स्कूलों में बच्चे पढ़ाने वाले अभिभावकों के विरोध पर सरकार ने यह संज्ञान लिया है।
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सरकारी स्कूलों में कल से आएंगे पहली से बारहवीं कक्षा के विद्यार्थी
प्रदेश के सरकारी स्कूलों और स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबंध निजी स्कूलों के विद्यार्थियों की सोमवार से नियमित कक्षाएं लगेंगी। पहली से बारहवीं कक्षा तक के विद्यार्थी सोमवार से स्कूल आएंगे। सरकारी स्कूलों के लिए सरकार ने पुराने आदेश ही बरकरार रखे हैं।
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हालांकि सरकारी स्कूलों में ऑफलाइन के साथ ऑनलाइन पढ़ाई भी जारी रहेगी। अगर कोई विद्यार्थी स्कूल नहीं आता है तो उसे व्हाट्सएप के माध्यम से शिक्षण सामग्री भेजी जाएगी। 11 नवंबर से तीसरी से सातवीं कक्षा के विद्यार्थियों को स्कूलों में बुलाया गया है। अब सोमवार से पहली और दूसरी कक्षा के विद्यार्थियों के लिए भी स्कूलों के दरवाजे खुल गए हैं।

उपायुक्त शिमला के समक्ष अभिभावकों ने जताया था रोष
पहली से सातवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों की 15 नवंबर से नियमित कक्षाएं चलाने के फैसले का शीतकालीन छुट्टियों वाले स्कूलों के अभिभावकों ने विरोध किया था। राजधानी शिमला में अभिभावकों ने उपायुक्त शिमला को मांगपत्र सौंपकर इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग उठाई थी। छात्र-अभिभावक मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा की अगुवाई में इस मांग को लेकर अभिभावक लामबंद हुए थे।

अभिभावकों का कहना है कि महज दस दिनों के लिए बच्चों को स्कूल बुलाने का कोई औचित्य नहीं है। एक सप्ताह में परीक्षाएं शुरू हो रही हैं, तो ऐसे में बच्चों को कुछ दिनों के लिए स्कूल न बुलाने की मांग की गई थी। उन्होंने कहा कि बच्चों की वैक्सीनेशन नहीं हुई है, वह संक्रमण से सुरक्षित नहीं है। बच्चा संक्रमण से अपना बचाव कर पाएगा, ऐसा संभव नहीं है।  साल भर में एक भी क्लास नहीं हुई, तो अब महज दस दिन के लिए स्कूल खोल कर क्या होगा।

स्कूलों को लेकर जारी किए जाएं स्पष्ट आदेश : मंच

शिक्षा निदेशक की ओर से सिर्फ सीबीएसई और आईसीएससी स्कूलों के पहली से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों को स्कूल बुलाने या न बुलाने के लिए एसएमसी और पीटीए से चर्चा कर फैसला लेने के आदेशों पर छात्र-अभिभावक मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने कहा कि यह आदेश स्पष्ट नहीं हैं। उन्होंने मांग की कि शीतकालीन सभी एचपी बोर्ड और अन्य बोर्ड के स्कूलों में ऑनलाइन ही कक्षाएं और परीक्षाएं ली जाएं।

उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में 90 फीसदी से अधिक स्कूल ऐसे हैं, जहां पर स्कूल प्रबंधन समिति और पीटीए सक्रिय ही नहीं है। ऐसे में स्कूल प्रशासन कैसे अभिभावकों की सहमति के बिना ऐसा निर्णय लेगा? उन्होंने निदेशक उच्च शिक्षा विभाग से मांग की है कि स्कूलों में बच्चों को बुलाए जाने को लेकर अपने आदेशों में ही स्पष्ट करें कि कक्षाएं चलेंगी या नहीं? पीटीए या एसएमसी पर बात न छोड़ी जाए। चूंकि, मामला छोटे बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा है। उन्होंने इस संदर्भ में जारी निदेशक के आदेशों को अधूरा करार दिया है। 

कहा कि ग्रीष्मकालीन स्कूलों में तीन माह और कक्षाएं चलेंगी जबकि, शीतकालीन स्कूलों में महज दस से बारह दिन कक्षाएं लगेंगी। अब माह के अंतिम एक सप्ताह के लिए स्कूल खोलकर और ऑफलाइन कक्षाएं लगवाकर अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि सरकार और विभाग सीधे आदेश जारी करे कि शीतकालीन स्कूलों में वार्षिक परीक्षाएं स्कूलों में न करवाकर ऑनलाइन ही करवाई जाएं। 15 नवंबर से स्कूलों में परीक्षाएं शुरू हो रही हैं, इसलिए फैसला जल्द लिया जाए। 

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