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पब्लिक परेशान: पिछले साल के लॉकडाउन के मुकाबले इस बार महंगाई की ज्यादा मार

Mon, 10 May 2021 10:05 AM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, शिमला/नाहन (सिरमौर)
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला/नाहन (सिरमौर) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 10 May 2021 10:05 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश में कोरोना संकट के बीच घरों या भवनों का निर्माण कार्य लगातार महंगा होता जा रहा है। निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सामग्री के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। बजरी, रेत और अन्य निर्माण सामग्री के रेट में भी काफी इजाफा हो रहा है। पिछले एक साल में सरिया करीब 1500 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ चुका है, जबकि सीमेंट के रेट भी 25 रुपये प्रति किलो तक बढ़ चुके हैं।

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Himachal News Price hike of construction materials food items Amid Covid
सरिया (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में कोरोना संकट के बीच घरों या भवनों का निर्माण कार्य लगातार महंगा होता जा रहा है। निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सामग्री के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। बजरी, रेत और अन्य निर्माण सामग्री के रेट में भी काफी इजाफा हो रहा है। पिछले एक साल में सरिया करीब 1500 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ चुका है, जबकि सीमेंट के रेट भी 25 रुपये प्रति किलो तक बढ़ चुके हैं।

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शिमला की बात करें तो इसके आसपास के क्षेत्रों में जीएसटी जोड़कर कामधेनु, जय भारत आदि कंपनियों का सरिया करीब 6400 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रहा है, जबकि एक साल पहले यही सरिया जीएसटी जोड़कर करीब 5000 रुपये प्रति क्विंटल था। इसी तरह से सीमेंट का 50 किलोग्राम का बैग 435 रुपये में मिल रहा है।
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यही बैग साल भर पहले 410 रुपये के हिसाब से मिल रहा था। जहां बजरी पिछले साल 28 रुपये प्रति वर्ग फुट मिल रही थी, वहीं अब यह 32 रुपये तक मिल रही है। बताया जा रहा है कि कोविड काल में निर्माण कार्यों के गति पकड़ने की वजह से ही दामों में बढ़ोतरी हुई है। इस बारे में उद्योग विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि बाजार में निर्माण सामग्री के दाम मांग और आपूर्ति पर ही निर्धारित होते हैं। इसमें सरकार का पूर्ण नियंत्रण नहीं होता है। 
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राशन के दामों में आया उछाल
एक साल में चित्रा राजमाह 100 से 135 रुपये, शर्मीली राजमाह 80-85 से बढ़कर 120 रुपये, काबुली चना 80-90 से बढ़कर 120 रुपये, काला चना 65-70 से बढ़कर 80 रुपये, मलका 70 से 80-85 रुपये हो गया है। अरहर के दाम तो 100 रुपये से 120 रुपये के बीच रहे हैं। चीनी पिछले साल 35-36 रुपये थी जो 39 रुपये पहुंच गई है। रिफाइंड तेल भी बहुत महंगा हो गया है। साल भर पहले यह 75 से 90 रुपये था, अब 150 रुपये प्रति लीटर हो गया है। सरसों का तेल 95 से 100 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 185 रुपये तक हो गया है। 

बाजार से किन्नू हुआ गायब, मौसमी के दामों में उछाल
शहर के फल विक्रेताओं की दुकानों से किन्नू गायब हो गया है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले दूसरे फलों के दामों में आग लगी हुई है। कोरोना काल में लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए कारगर माने जाने वाला किवी, मौसमी और संतरा आम आदमी की पहुंच से दूर हो गया है।

गौरतलब रहे कि संक्रमण से बचने के साथ ही संक्रमितों की सेहत में सुधार के लिए चिकित्सक इन फलों का सेवन करने की सलाह दे रहे हैं लेकिन संकट के इस दौर में यह फल आम लोगों से पहुंच से दूर हो रहे हैं। विशेषज्ञों की माने तो कोरोना वायरस से बचने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता का मजबूत रहना बेहद जरूरी है। कमजोर रोग प्रतिरोधक वालों को संक्रमण का खतरा अधिक है। ऐसे में विशेषज्ञ चिकित्सक लोगों को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए फल विशेषकर खट्टे फलों को खाने की सलाह दे रहे हैं। 

वर्तमान में इनके दाम बढ़ने से यह फल आम लोगों की पहुंच से दूर हो गए हैं। कोरोना संक्रमित के लिए अत्यंत लाभकारी किन्नू फलों की दुकानों में देखने को भी नहीं मिल रहा है। जबकि कमजोर नस्ल का संतरा सौ रुपये और बेहतर नस्ल का संतरा 150 रुपये में बिक रहा है। फल विक्रेता कीवी के दाम भी मनमाने रूप से वसूल रहे हैं। किवी कहीं 50 तो कहीं 70 से 80 रुपये प्रति पीस बिक रहा है।

विटामिन सी युक्त मौसमी के दाम 140 तक पहुंच गए हैं। सेब 180 से 250, नारियल पानी 90 से सौ रुपये मिल रहा है। इसी प्रकार खून की कमी को दूर करने वाला अनार 150 रुपये और अनायास के दाम 80 रुपये पहुंच चुके हैं। फलों में लगी आग के कारण गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार इसे खरीद नहीं पा रहे हैं।


विक्रेता मोहम्मद इकबाल शेख का कहना है कि कोरोना संक्रमण के चलते फलों की मांग पहले से दोगुनी हो गई है। फल मंडी में मांग अधिक और आवक कम होने से फलों के दामों में इजाफा हुआ है। उन्होंने कहा कि किन्नू का मौसम चला गया है। जबकि संतरा, किवी, मौसमी मंडी से ही महंगे दाम में मिल रहे हैं।

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